भारत - ईयू डील का ऐलान 26 जनवरी को, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और वोल्वो जैसी लक्जरी कारें देश में होंगी सस्ती
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का मामला अभी तक परवान नहीं चढ़ पाया है, लेकिन भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बड़ी ट्रेड डील की तरफ अग्रसर हैं। यूरोपियन यूनियन से इस डील के बाद यूरोपीय देशों से भारत आने वाली कारों पर टैरिफ काफी कम हो सकते हैं जिससे बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और वोल्वो जैसी लक्जरी कारें देश में सस्ती हो सकती हैं।
यूरोपियन यूनियन द्वारा भारत को फेवर्ड नेशन की सूची से हटा दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद भारत यूरोपीय देशों से कारोबार बढ़ाने को लेकर आशान्वित है। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच करीब 18 साल के बाद नयी डील, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, पर सहमति बन गई है। इस पर 27 जनवरी को इस अहम समझौत पर साइन की अपौचारिकता पूरी की जाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय के एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य अमेरिकी शुल्क के कारण वैश्विक व्यापार में जारी व्यवधानों के बीच दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना है। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद यह समझौता अब अपने अंतिम चरण में है। इस डील को लेकर बातचीत का दौर वर्ष 2007 में शुरू हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को अब तक का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है। अधिकारी ने बताया कि वार्ता के समापन की घोषणा यहां आयोजित होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान की जाएगी।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन चार दिवसीय यात्रा पर भारत में हैं। उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ 27 जनवरी को के साथ शिखर वार्ता होगी। वार्ता के बाद डील का एलान इसी हफ्ते हो सकती है। हालांकि इसके क्रियान्वयन में थोड़ा समय लग सकता है क्योंकि इसे यूरोपीय संसद की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जबकि भारत में इसे केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की अनुमति की जरूरत होगी।
यूरोपियन यूनियन के साथ समझौते के तहत दोनों पक्ष आपसी व्यापार वाली 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क को कम या समाप्त करेंगे। कपड़ा और फुटवियर जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों पर शुल्क पहले ही दिन से समाप्त हो सकता है, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं पर इसे पांच से दस वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
भारत इस समझौते के जरिए अपने कपड़ा, चमड़ा और हथकरघा जैसे क्षेत्रों के लिए शून्य-शुल्क बाजार पहुंच की तलाश में है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ अपने ऑटोमोबाइल निर्यात, वाइन और हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्रों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है। संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को फिलहाल इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। यह भारत के विशाल ऑटो बाजार को खोलने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम हो सकता है। दोनों पक्ष एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, जिसका ऐलान मंगलवार को होने की उम्मीद है।
बिक्री के लिहाज से भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने EU से आने वाली कारों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। मोदी सरकार ने 15,000 यूरो (लगभग 13.5 लाख रुपये) से ज्यादा कीमत वाली कारों पर तत्काल टैक्स कटौती के लिए सहमत हो गई है। इसके बाद आने वाले समय में यह टैरिफ घटाकर 40% तक किया जा सकता है। अभी यह टैरिफ 110% है, जिसे घटाकर 40% तक करने का प्लान है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को शुरुआती पांच साल तक इस ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो मर्सिडीज, BMW, वोक्सवैगन, वोल्वो और रेनो जैसी कारें भारत में सस्ती हो जाएंगी।
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था। इसके अलावा, यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 117.4 अरब डॉलर रहा है।
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