पाकिस्तान के खैबर जिले में 10 महीने से बंद तोरखम ब

पाकिस्तान में तोरखम बॉर्डर खोलने की मांग तेज, 10 महीने की बंदी के खिलाफ हजारों लोगों का प्रदर्शन

Representative Image (File Photo)

खैबर पख्तूनख्वा (पाकिस्तान)। खैबर जिले के लांडी कोतल तहसील स्थित बाचा खान चौक पर पिछले करीब 10 महीनों से बंद तोरखम बॉर्डर को तत्काल खुलवाने की मांग को लेकर एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आदिवासी बुजुर्गों, व्यापार मंडल के सदस्यों और मजदूरों ने हिस्सा लिया और चेतावनी दी कि यदि बॉर्डर नहीं खुला तो वे पाक-अफगान राजमार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

व्यापार और रोजगार पर बंदी का गहरा असर

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस बड़े विरोध प्रदर्शन में खैबर जिले की तीनों तहसीलों से आए ट्रांसपोर्टर्स, सीमा शुल्क एजेंटों, युवा प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने भारी संख्या में शिरकत की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बताया कि बॉर्डर के लंबे समय से बंद रहने के कारण द्विपक्षीय व्यापार और पैदल आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। इससे हजारों लोगों की आजीविका छिन गई है और लाखों अन्य लोग गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस बंदी ने खैबर और अन्य आदिवासी जिलों की आर्थिकी को गहरा आघात पहुंचाया है।

जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों (दो सीनेटर, एक नेशनल असेंबली सदस्य, चार प्रांतीय विधानसभा सदस्यों और क्षेत्र के मुख्यमंत्री) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता की बुनियादी आर्थिक समस्याओं पर नेशनल असेंबली, सीनेटर या उच्च स्तरीय बैठकों में कोई गंभीर पहल नहीं हो रही है, और केवल बयानों या सोशल मीडिया पोस्ट से जनसमस्याओं का समाधान संभव नहीं है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि हालांकि बॉर्डर बंद होने के कारण सभी को पता हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस मामले को हल करने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं।

जमात-ए-इस्लामी ने सरकार पर साधा निशाना

जामात-ए-इस्लामी खैबर जिले के अमीर शाह फैसल अफरीदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तोरखम बॉर्डर की बंदी के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को लगातार विभिन्न मंचों पर उठाया है, प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं और बॉर्डर को फिर से खोलने की मांग की है। अफरीदी ने इस बात पर जोर दिया कि इस अनिश्चितकालीन बंदी ने न सिर्फ वैध आजीविका के साधनों को बाधित किया है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के शैक्षणिक और आर्थिक अवसरों को भी सीमित कर दिया है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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