ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर हिरासत में लिए गए तेल

पारादीप बंदरगाह पर हिरासत में लिए गए 'यूनिटी' टैंकर के रूसी चालक दल को लेकर रूस के संपर्क में भारत

Ministry of External Affairs Spokesperson Randhir Jaiswal

नई दिल्ली (भारत)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को कहा कि ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास हिरासत में लिए गए यूनिटी तेल टैंकर पर सवार रूसी चालक दल के सदस्यों के कल्याण और स्वदेश वापसी के संबंध में भारत रूसी दूतावास के साथ नियमित संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि टैंकर वर्तमान में पारादीप बंदरगाह के पास खड़ा है और इसे ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश के तहत हिरासत में लिया गया है।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग

जायसवाल ने नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “रूसी नाविकों के कल्याण के संबंध में, यह विशेष तेल टैंकर ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास खड़ा है। हम इस घटना से अवगत हैं और हम यहां रूसी दूतावास के साथ नियमित संपर्क में हैं।” उन्होंने आगे कहा, “टैंकर को हिरासत में लेने की यह कार्रवाई ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेशों के कारण की गई है। रूसी चालक दल की स्वदेश वापसी के संबंध में हम उचित कार्रवाई कर रहे हैं।” कैमरून के झंडे वाला जहाज 'यूनिटी' मई से ओडिशा उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद हिरासत में है। यह मामला कथित तौर पर ईंधन के बकाया भुगतान न होने से जुड़े एक व्यापारिक विवाद से संबंधित है। जहाज पारादीप तट से लगभग 10 किलोमीटर दूर लंगर डाले खड़ा है।

डेटाबेस के अनुसार, जहाज पारादीप से हिरासत में

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने परित्यक्त नाविकों से संबंधित अपने संयुक्त आईएलओ-अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) डेटाबेस के माध्यम से 'यूनिटी' को रूसी नाविकों से संबंधित परित्याग मामले के रूप में दर्ज किया है। डेटाबेस के अनुसार, जहाज पारादीप में हिरासत में है और उसके वेतन बकाया हैं और स्वदेश वापसी लंबित है। आईएलओ-आईएमओ डेटाबेस में कोलकाता स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास के 16 जुलाई के एक पत्र का भी उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि रूसी नाविकों के रोजगार अनुबंध समाप्त हो गए हैं, वेतन का काफी बकाया है और चालक दल स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा में अनुबंध अवधि से अधिक समय तक जहाज पर ही रुका हुआ है।

टैंकर में संभवतः 23 चालक दल के सदस्य

कोलकाता स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास के अनुसार, टैंकर में संभवतः 23 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें 20 रूसी नागरिक, एक कजाख नागरिक और दो मिस्र के नागरिक शामिल थे। चालक दल की वापसी के मामले में 21 सितंबर को अदालत में सुनवाई होगी। वाणिज्य दूतावास ने कहा कि इस जहाज को परित्याग का मामला माना गया है और सभी संबंधित पक्षों से चालक दल की राहत और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पूरा करने का आग्रह किया है। दूतावास ने जहाजरानी महानिदेशालय और कोलकाता स्थित वाणिज्यिक समुद्री विभाग से रूसी चालक दल के सदस्यों की शीघ्र स्वदेश वापसी और उनके बकाया वेतन के भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने का भी अनुरोध किया है।

बंकर ईंधन के भुगतान को लेकर हुआ विवाद

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएलओ) ने नाविक परित्याग के मामलों से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें बंदरगाह राज्यों, ध्वज राज्यों और उन राज्यों के लिए, जिनके नाविक नागरिक हैं, ऐसे मामलों को संबोधित करने और परित्यक्त नाविकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करने की आवश्यकता शामिल है। डेटाबेस से पता चलता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने भी 16 जुलाई को संबंधित सदस्य देशों को यूनिटी मामले में उचित कार्रवाई करने के लिए तत्काल अनुरोध भेजा था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के लिए रूसी कच्चे तेल को उतारने के लिए पारादीप पहुंचने के बाद इस जहाज को हिरासत में लिया गया था। उच्च न्यायालय का आदेश जहाज को आपूर्ति किए गए बंकर ईंधन के भुगतान को लेकर हुए विवाद के बाद आया। (इनपुट: ANI)

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