खैबर-पख्तूनख्वा में दवाओं की कीमतों में भारी उछाल, इंसुलिन हुआ दोगुना महंगा
पेशावर (पाकिस्तान)। खैबर-पख्तूनख्वा में इंसुलिन सहित आवश्यक दवाओं की कीमतों में भारी उछाल ने मरीजों और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय मीडिया 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक कीमतों में इस तेज वृद्धि का सबसे बुरा असर उन कमजोर वर्गों पर पड़ने की उम्मीद है जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।
इंसुलिन की कीमत दोगुनी से ज्यादा
सबसे अधिक चिंताजनक वृद्धि इंसुलिन की कीमतों में देखी गई है, जो मधुमेह (डायबिटीज) के लिए एक जीवन रक्षक दवा है। एक इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 पाकिस्तानी रुपये से दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 4,720 रुपये हो गई है। कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी से उन हजारों मधुमेह रोगियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की संभावना है, जो अपने ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य रखने के लिए नियमित खुराक पर निर्भर हैं।
थायराइड दवा में सबसे ज्यादा उछाल
अन्य सामान्य दवाओं की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बदहजमी और एसिडिटी के लिए इस्तेमाल होने वाले एक पैक की कीमत 530 रुपये से बढ़कर 620 रुपये हो गई है। विटामिन और पोषक तत्वों की खुराक अब 480 रुपये के बजाय 510 रुपये में मिल रही है। इसी तरह, विटामिन-बी की कमी की दवा 500 रुपये से बढ़कर 600 रुपये हो गई है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव थायराइड की दवा में देखा गया है। इसकी कीमत 85 रुपये से बढ़कर सीधे 290 रुपये हो गई है जो कि 240 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
टाइफाइड सहित कई दवाएं महंगी, पेशावर में नई दरें लागू
टाइफाइड के इलाज की दवाएं भी महंगी हो गई हैं और इनकी कीमत 805 रुपये से बढ़कर 930 रुपये तक पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, इन संशोधित दरों को नियामक अधिकारियों ने मंजूरी दे दी है और ये पेशावर के सभी फार्मेसियों में लागू हो चुकी हैं। अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि की आशंका है, हालांकि अभी पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कीमतों में इतनी भारी वृद्धि से मरीज अपनी खुराक छोड़ सकते हैं या सस्ते और असुरक्षित विकल्पों का सहारा ले सकते हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
फार्मासिस्टों ने सरकार से की राहत की मांग
फार्मासिस्टों ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए कम आय वाले परिवारों और बुजुर्ग मरीजों पर बढ़ते बोझ की बात कही है। विशेषज्ञों ने सरकार से इन कीमतों पर पुनर्विचार करने और सब्सिडी या वित्तीय राहत के उपाय करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, उन्होंने सस्ती दवाओं की बढ़ती मांग के बीच घटिया दवाओं की बिक्री को रोकने के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
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