अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पश्चिम

पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान के पलटवार का दावा, अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

Middle East Tensions Escalate as Iran Claims Missile Retaliation Against US Targets

तेहरान/अम्मान। पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर की गई बमबारी के जवाब में ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने गुरुवार दोपहर करीब 2:20 बजे उत्तरी जॉर्डन में स्थित अमेरिकी 'अल-अज़राक हवाई अड्डे' पर 10 बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला करने का दावा किया है। ईरान ने इस बेस को "पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना का मुख्य कमांड और कंट्रोल सेंटर" बताया है।

दो चरणों में ईरान का जवाबी हमला

ईरान के सरकारी प्रसारक (IRIB) के अनुसार, तेहरान पर हुए अमेरिकी हमलों के खिलाफ यह ईरान की जवाबी कार्रवाई का दूसरा चरण था। इससे पहले ईरान पहले चरण की दंडात्मक कार्रवाई भी कर चुका है। आईआरजीसी ने इससे पहले कुवैत के आरिफजान व अली अल सलेम बेस और बहरीन के जुफैर व शेख ईसा चौकियों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला कर उनके बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। उत्तरी जॉर्डन के अमेरिकी एयरबेस पर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिसे नष्ट करने का दावा ईरान ने किया है।

ईरान की खुली चेतावनी

अगर अमेरिकी आतंकवादी सेना ने अपनी आक्रामकता दोबारा दोहराई, तो क्षेत्र में मौजूद उनका कोई भी सैन्य ठिकाना हमारी भारी गोलावारी से सुरक्षित नहीं रहेगा। जॉर्डन में बजे हवाई हमले के सायरन, मिसाइलें हवा में ही रोकी गईं। इस हमले के बाद जॉर्डन सरकार भी पूरी तरह अलर्ट पर आ गई है। जॉर्डन के सरकारी प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी ने पुष्टि की है कि ईरानी मिसाइलों के देश के हवाई क्षेत्र (Airspace) में प्रवेश करते ही सुरक्षा सायरन बजा दिए गए थे।

जॉर्डन का दावा

जॉर्डन की सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन ईरानी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट (रोककर) करके नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने कहा कि जॉर्डन के वीर सशस्त्र बल देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

आखिर क्यों शुरू हुआ यह ताजा विवाद?

इस भीषण टकराव की शुरुआत अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) की उस कार्रवाई से हुई, जिसमें उन्होंने बुधवार को ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हवाई हमले शुरू किए थे।

सेना की गई कार्रवाई के मुख्य कारण

अमेरिका (CENTCOM)ईरान पर हवाई हमले किए।होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। चाबहार और बुशहर शहरों में भारी नुकसान हुआ है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर चाबहार में बिजली गुल हो गई और बुशहर में भी कई धमाके सुने गए। ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन" बताया है और अमेरिकी सेना के खिलाफ जंग जारी रखने का संकल्प लिया है। (एएनआई)

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