मिनाब हमले के पीड़ितों ने पोप लियो 16 से की मार्मिक अपील
तेहरान (ईरान)। ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में स्कूल पर हुए मिसाइल हमले के पीड़ित परिवार वालों ने पोप लियो 16 से अपील की है कि वे 'उनके बेज़ुबान बच्चों की आवाज़' बनें और टिकाऊ शांति के लिए बातचीत पर ज़ोर दें। प्रेस टीवी ने यह खबर दी है।
मिनाब स्कूल हमले की दर्दनाक यादें और तबाही
पोप को लिखे एक पत्र में, अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में मारे गए स्कूली बच्चों के रिश्तेदारों ने कहा कि उनके शांति के संदेश ने 'हमारे टूटे दिलों पर मरहम लगाया है।' प्रेस टीवी ने बताया, 'स्कूल में यह हमला 28 फरवरी को हुआ था, जब अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल करके ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब के शजारे तैयबे एलिमेंट्री स्कूल पर हमला किया गया था। उसमें 170 से ज़्यादा बच्चे और शिक्षक मारे गए थे।'
युद्धोन्माद के खिलाफ माता-पिता का गहरा आक्रोश
पीड़ित परिवारों ने इस घटना को उन विवेकहीन युद्धोन्मादियों के उकसावे और समर्थन का सीधा परिणाम बताया जिन्होंने उनके मासूम बच्चों पर तबाही मचाई।' पत्र में कहा गया कि, 'आज, अपने बच्चों के गले लगने की गर्मी महसूस करने की बजाए, हमें उनके जले हुए बैग और खून से सने जर्नल पकड़ने पड़ रहे हैं। हमारे बच्चे एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए कभी घर नहीं लौटेंगे, लेकिन हम दुखी माता-पिता की प्रार्थना है कि 'हथियार डालने' का आपका मैसेज सुना जाए, ऐसे समय में जब अमेरिका और इज़राइली सरकार अपनी बहुत ज़्यादा मांगों से इन ज़ुल्मों की आग को और भड़का रही है।'
पोप से बेज़ुबान बच्चों की आवाज़ बनने की अपील
सीधे पोप से अपील करते हुए, परिवारों ने कहा कि पोप 'हमारे बेज़ुबान बच्चों की आवाज़ बनें' और उम्मीद जताई कि उनका असर एक ऐसी दुनिया बनाने में मदद कर सकता है जहाँ कोई भी माता-पिता 'कभी भी अपने बच्चे की ठंडी कब्र पर रात में लोरी फुसफुसाने के लिए मजबूर न हो।'
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