मौजूदा संसद (क्नेसेट) का चार साल का कार्यकाल 17 जु

क्षेत्रीय तनाव के बीच नेतन्याहू के सामने चुनाव, 27 अक्टूबर को होगा मतदान

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

तेल अवीव (इज़राइल) । इज़राइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार का चार साल का संसदीय कार्यकाल पूरा होने के बाद, इज़राइल में अगला आम चुनाव 27 अक्टूबर को होने जा रहा है। टाइम्स ऑफ इज़राइल ने रविवार को बताया कि सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के एक वरिष्ठ नेता, ओफिर काट्ज़ ने चुनाव तिथि की पुष्टि की है, जो वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप है, क्योंकि मौजूदा संसद (क्नेसेट) का चार साल का कार्यकाल 17 जुलाई को समाप्त हो रहा है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए आवेदन फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर निर्धारित की गई है। 

1988 के बाद कार्यकाल पूरा करने वाली पहली सरकार होगी

उल्लेखनीय है कि 1988 के बाद यह पहली बार है कि इज़राइल में आम चुनाव निर्धारित समय पर होंगे। इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इज़राइल ने बताया कि नेतन्याहू सरकार पांच दशकों से अधिक समय में अपना पूरा चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली पहली सरकार होने का गौरव प्राप्त करेगी। शरद ऋतु में चुनाव की तिथि को अंतिम रूप देने का निर्णय सत्तारूढ़ गठबंधन के औपचारिक अनुरोध के बाद लिया गया है, जिसमें संसदीय चक्र को मूल योजना के अनुसार ही समाप्त करने की अनुमति मांगी गई थी। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 17 जुलाई को संसद (क्नेसेट) आधिकारिक तौर पर चुनाव अवकाश में चली जाएगी, जो कि संसद के कार्यकाल की समाप्ति का दिन है।

गंभीर उथल पुथल का सामना कर रहे हैं नेतन्याहू

साथ ही, विभिन्न राजनीतिक गुटों द्वारा अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने और जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर निर्धारित की गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जिन्होंने 2022 में इजरायल के इतिहास में सबसे दक्षिणपंथी सरकार बनाकर राजनीतिक वापसी की थी, अक्टूबर 2023 में हमास के अचानक हमले के बाद से गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं। इस घटना ने उनकी लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा साख को काफी प्रभावित किया है। टाइम्स ऑफ इजरायल ने आगे बताया कि अनुभवी नेता अभी भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं, जो 2019 में शुरू हुए थे और दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल की सजा हो सकती है। गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्षों की रणनीतिक दिशा को लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। (एएनआई)

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