PM मोदी की यहूदी नव वर्ष की शुभकामनाओं पर नेतन्याहू बोले- जल्द फिर मिलने की उम्मीद
तेल अवीव (इज़राइल)। तेल अवीव में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहूदी नव वर्ष की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भारत और इज़राइल के संबंधों के ‘अभूतपूर्व साझेदारी’ में बदलने पर ज़ोर दिया। X पर PM मोदी की शुभकामनाओं के जवाब में नेतन्याहू ने उनके नेतृत्व की प्रशंसा की और दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत संबंधों को दोहराया। उन्होंने कहा कि यहूदी नव वर्ष PM मोदी के नेतृत्व और स्थायी मित्रता के लिए धन्यवादनेतन्याहू ने कहा, "हमने साथ मिलकर अपनी प्राचीन सभ्यताओं के बीच के संबंधों को दो महान लोकतंत्रों के बीच एक अभूतपूर्व साझेदारी देने का अवसर है।
नेतन्याहू ने कहा- जल्द फिर मिलने की उम्मीद
नेतन्याहू ने कहा, "हमने साथ मिलकर अपनी प्राचीन सभ्यताओं के बीच के संबंधों को दो महान लोकतंत्रों के बीच एक अभूतपूर्व साझेदारी में बदल दिया है। सारा और मैं जल्द ही आपसे फिर मिलने की उम्मीद करते हैं।" उन्होंने इज़राइल के लोगों और खुद की ओर से PM मोदी की गर्मजोशी भरी शुभकामनाओं के लिए आभार जताया। नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच संबंधों और मित्रता को भी रनेतन्याहू का संदेश PM मोदी की उस पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने यहूदी नव वर्ष पर इज़राइली नेतृत्व और दुनिया भर के यहूदी समुदायों को बेखांकित किया।
PM मोदी ने रोश हशनाह पर दी शुभकामनाएं
नेतन्याहू का संदेश PM मोदी की उस पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने यहूदी नव वर्ष पर इज़राइली नेतृत्व और दुनिया भर के यहूदी समुदायों को बधाई दी थी। PM मोदी ने लिखा, "शाना तोवा! प्रधानमंत्री नेतन्याहू, इज़राइल के लोगों और दुनिया भर के यहूदी समुदायों को रोश हशनाह की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। नया साल सभी के लिए शांति, आशा, अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर प्रगति से भरा हो।"
<blockquote lang="en" dir="ltr">Thank you, Prime Minister @narendramodi for your warm wishes to the people of Israel and to me personally.
The Jewish New Year provides an occasion to thank you again for your leadership and enduring friendship.
Together, we've transformed the ties between our ancient civilizations into an unprecedented partnership between two great democracies.
Sara and I look forward to seeing you again soon. 🇮🇱🇮🇳</p>— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) <a href="https://x.com/IsraeliPM/status/2099416856738099435?ref_src=twsrc%5Etfw">September 14, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान शुभकामनाएं
PM मोदी ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर नेतन्याहू को शुभकामनाएं दीं। उसी दिन उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली घोषणा 2026’ को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। घोषणा में पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और अधिकतम संयम बरतने के साथ ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया, जो स्थिति को और खराब कर सकती हैं।
BRICS घोषणा में पश्चिम एशिया पर चिंता
घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करते हुए नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। इसमें बातचीत और कूटनीति के जरिए क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दीर्घकालिक समझ बनाने के प्रयासों का समर्थन किया गया। साथ ही, लागू अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता
प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए नागरिक बुनियादी ढांचे और IAEA की पूरी सुरक्षा निगरानी वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इसमें कहा गया कि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए सशस्त्र संघर्षों सहित हर स्थिति में परमाणु सुरक्षा और बचाव के मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
गाजा में संघर्ष-विराम और मानवीय सहायता की अपील
BRICS समूह ने UNGA और UNSC के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने का आह्वान किया। सभी पक्षों से गाजा पट्टी में संघर्ष-विराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया गया। संयुक्त घोषणापत्र में अक्टूबर 2025 के संघर्ष-विराम समझौते के बावजूद गाजा में जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। साथ ही, गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई किसी भी नीति को रोकने का आह्वान किया गया।
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर
घोषणापत्र में कहा गया कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से हासिल किया जा सकता है। यह फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों, जिनमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार शामिल है, को पूरा करने पर निर्भर करता है। संयुक्त घोषणापत्र में ध्रुवीकरण और अविश्वास के मौजूदा वैश्विक माहौल का भी उल्लेख किया गया और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा दिया गया।
परमाणु खतरे और संघर्ष के जोखिम पर BRICS की चिंता
ब्रिक्स देशों के संयुक्त घोषणापत्र में परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिमों पर भी चिंता व्यक्त की गई। इसमें वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा हासिल करने के लिए निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता दोहराई गई। घोषणापत्र में इस प्रणाली की अखंडता और प्रभावशीलता को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। (Source: ANI)
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