चीन की टेराकोटा आर्मी पर एक नई रिसर्च में संकेत मि

चीन की टेराकोटा आर्मी पर नई स्टडी, 45% कारीगरों के पुरुष होने का अनुमान

चीन की टेराकोटा आर्मी पर नई स्टडी

शियान: एक नई स्टडी में कहा गया है कि टेराकोटा आर्मी, जो सबसे पहले 1974 में चीन के शियान में खोजी गई थी, शायद महिलाओं और बाल मज़दूरों ने बनाई होगी। पेपर के मुताबिक, इस आर्कियोलॉजिकल अजूबे को बनाने वाले मज़दूरों में महिला मज़दूरों की संख्या लगभग 33 परसेंट हो सकती है, जबकि 15 साल से कम उम्र के नाबालिगों की संख्या 22 परसेंट हो सकती है। टेराकोटा वॉरियर्स की खोज सबसे पहले मार्च 1974 में हुई थी। terracottawarriorsmuseum.com वेबसाइट के मुताबिक, 29 मार्च 1974 को टेराकोटा वॉरियर्स, एक अनोखी आर्कियोलॉजिकल खोज, चीन के शियान में लोकल किसानों ने खोजी थी। असली साइज़ के टेराकोटा वॉरियर्स की इस अनोखी आर्मी को चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग के साथ दफनाया गया था, ताकि उनकी मौत के बाद उनकी रक्षा की जा सके। किन शी हुआंग इतिहास में उस सम्राट के तौर पर मशहूर हैं जिन्होंने अलग-अलग चीनी राज्यों को राजनीतिक रूप से एक किया और पहले चीनी राज्य की नींव रखी।

रिसर्च में टेराकोटा आर्मी के निर्माण से जुड़े श्रमिकों की पहचान पर जोर

जर्नल ऑफ कल्चरल हेरिटेज में छपे इस पेपर का टाइटल था, 'चीन में सम्राट किन शिहुआंग की टेराकोटा आर्मी किसने बनाई? फिंगरप्रिंट से उम्र और लिंग तय करने का एक बायेसियन मिक्सचर मॉडल तरीका।' इसमें आगे कहा गया, "तीसरी सदी BCE के दौरान किन साम्राज्य के एक बड़े नेशनल प्रोजेक्ट के तौर पर सम्राट किन शिहुआंग के मकबरे का बनना और उससे जुड़ी दफनाने की चीज़ों का बनना, किन साम्राज्य की बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को ऑर्गनाइज़ करने और लागू करने की काबिलियत को दिखाता है। किन शिहुआंग के मकबरे में दफन सांस्कृतिक निशानियां, खासकर बड़ी संख्या में टेराकोटा योद्धा और घोड़े, किन साम्राज्य के अंदर ज़रूरी हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्शन के मुद्दों की खोज के लिए मटीरियल का एक बड़ा सोर्स देते थे, जिसमें लेबर डिस्ट्रीब्यूशन, स्टैंडर्डाइज़ेशन और ऑर्गेनाइज़ेशनल मैनेजमेंट जैसे ज़रूरी पहलू शामिल थे।

फिंगरप्रिंट विश्लेषण के लिए बायेसियन मिक्सचर मॉडल का इस्तेमाल

इसमें यह भी कहा गया है, किन स्टडीज़ में आम सोच यह है कि बड़े पैमाने पर क्राफ्ट प्रोडक्शन सिर्फ बड़े मर्दों की मेहनत पर निर्भर करता था, लेकिन किन के कानूनी डॉक्यूमेंट्स और खुदाई से मिली चीज़ों से मिले छिटपुट सबूतों से इस सोच को चुनौती मिलती है। किन लैकरवेयर पर लिखी चीज़ों में दा नुज़ी (大女子, बड़ी औरत), "ज़ियाओ नुज़ी" (小女子, जवान लड़की), और "ज़ियाओ नानज़ी" (小男子, जवान लड़का) जैसे टाइटल शामिल हैं, जो दिखाते हैं कि औरतें और बच्चे सरकारी निगरानी में लैकर प्रोडक्शन में हिस्सा लेते थे।" हालांकि, अब तक इन दावों को सही साबित करने के लिए कोई पक्का सबूत नहीं था। पेपर के लेखक- ज़ियाओक्सी ली, जिंगयी शेन, देशेंग लैन, जिंगयी वांग, यांग यू, जिंगये काई, यिन ज़िया और पिंग झोउ ने इस सवाल का जवाब देने के लिए एक अलग तरीका सोचा। उन्होंने एक स्टैटिस्टिकल मॉडल का इस्तेमाल किया जिसे बायेसियन मिक्सचर मॉडल कहते हैं, जो हर एक निशान को अलग-अलग क्लासिफाई करने की कोशिश करने के बजाय एक ही बार में फिंगरप्रिंट के पूरे ग्रुप का एनालिसिस करता है। 

महिलाओं और किशोरों की भागीदारी के भी मिले संकेत

वेबसाइट Phys.org के अनुसार, यह अलग-अलग उम्र और लिंग के लिए पुराने प्रिंट की तुलना मॉडर्न फिंगरप्रिंट डेटा से करता है। उन्होंने आर्टिफैक्ट्स पर अनजाने में छोड़े गए फिंगरप्रिंट्स को एनालाइज़ और कैटेगरी में रखने के लिए बायेसियन मिक्सचर मॉडल का इस्तेमाल किया। उन्हें जो रिज़ल्ट मिले, उन्होंने अब इस बारे में लंबे समय से चली आ रही सोच को चुनौती दी है कि टेराकोटा वॉरियर्स को असल में किसने बनाया था। Phys.org ने स्टडी के लेखकों के हवाले से अपने पेपर में लिखा, मॉडल के रिज़ल्ट बताते हैं कि कारीगर कम्युनिटी सिर्फ़ बड़े पुरुषों से नहीं बनी थी। पोर्टल ने आगे कहा, असल में मॉडल ने अनुमान लगाया कि बड़े पुरुषों के फिंगरप्रिंट्स का हिस्सा सिर्फ़ लगभग 45% था। पेपर में आगे कहा गया, हमारे रिज़ल्ट बड़े महिलाओं और किशोरों सहित अलग-अलग तरह के वर्कफोर्स का पहला बायोलॉजिकल सबूत देते हैं, जो किन इंपीरियल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन के बारे में लंबे समय से चली आ रही सोच को चुनौती देते हैं।

(इनपुट: ANI)

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