बलूच मानवाधिकार संगठन ‘पांक’ ने ग्वादर में साजिद औ

ग्वादर में दो भाइयों के कथित जबरन गायब किए जाने पर पांक (बलूच मानवाधिकार विभाग) ने जताई चिंता, तत्काल रिहाई की मांग

Paank Condemns Alleged Disappearance of Two Brothers in Gwadar

ग्वादर (बलूचिस्तान)। बलूच मानवाधिकार संगठन 'पांक' ने ग्वादर में दो भाइयों के कथित जबरन गायब किए जाने को लेकर चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, साजिद बलूच और अकील बलूच को 22 अगस्त को पाकिस्तानी सैन्य बलों ने कथित तौर पर हिरासत में लिया। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। 'पांक' ने दोनों भाइयों की तत्काल और सुरक्षित रिहाई की मांग करते हुए बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की घटनाओं पर रोक लगाने की अपील की है।

ग्वादर में मजदूरी कर रहे दोनों भाइयों को रास्ते से उठाने का आरोप

'पांक' ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मोहम्मद बख्श के बेटे इन दोनों भाइयों को कथित तौर पर 22 अगस्त को ग्वादर में पाकिस्तानी सैन्य बलों ने उठा लिया था। 'पांक' के अनुसार, कोल्वाह के सैंडम गांव के रहने वाले साजिद और अकील ग्वादर के कांटानी इलाके में मजदूर के तौर पर काम कर रहे थे। संगठन ने कहा कि जब ये भाई अपने गृहनगर लौट रहे थे, तो सैन्य कर्मियों ने उन्हें रोका और बाद में जबरन गायब कर दिया।

'पांक' ने जबरन गायब करने की निंदा कर तत्काल रिहाई की मांग की

संगठन ने अपने X पोस्ट में कहा, "पांक दो भाइयों के जबरन गायब किए जाने की कड़ी निंदा करता है," और कहा कि उनके ठिकाने के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। 'पांक' ने जबरन गायब करने को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि इससे पीड़ित कानून के संरक्षण से बाहर हो जाते हैं, जिससे वे यातना और अन्य दुर्व्यवहार जैसे खतरों का शिकार हो सकते हैं।संगठन ने दोनों भाइयों की सुरक्षा और भलाई के लिए पाकिस्तानी सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और उनकी "तत्काल और सुरक्षित रिहाई" की मांग की। 'पांक' ने बलूचिस्तान में जबरन गायब करने के चल रहे चलन को खत्म करने की भी मांग की।

बलूच कार्यकर्ताओं और नागरिकों के गायब होने पर 'पांक' जताता रहा है चिंता

'पांक', जो बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को दर्ज करने और उजागर करने का काम करता है, ने बलूच राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और नागरिकों के जबरन गायब होने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और कथित दुर्व्यवहार के मामलों पर बार-बार चिंता जताई है। संगठन ने बार-बार जबरन गायब करने को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है और कहा है कि पीड़ित कानून के संरक्षण से बाहर हो जाते हैं और यातना तथा अन्य गंभीर दुर्व्यवहारों के शिकार हो सकते हैं।

बलूचिस्तान में जबरन गायब होने का मुद्दा वर्षों से गंभीर चिंता

बलूचिस्तान में जबरन गायब करने का मुद्दा वर्षों से मानवाधिकारों की एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। बलूच अधिकार समूहों और लापता लोगों के परिवारों ने बार-बार आरोप लगाया है कि लोगों को बिना उचित प्रक्रिया के हिरासत में लिया जाता है और अधिकारी उनके ठिकाने का खुलासा नहीं करते हैं। अधिकार संगठनों ने लापता लोगों के मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। (Source: ANI)

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