पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक द्वारा जारी एक नई रि

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय में 34.1 अरब रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर, ऑडिट रिपोर्ट से मचा हड़कंप

Federal Directorate of Immunization

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक (एजीपी) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा मंत्रालय (एनएचएस) के तहत संचालित विभिन्न संस्थानों में 34.1 अरब रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस खुलासे ने देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और वित्तीय प्रशासन को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

ऑडिट में सामने आईं करोड़ों की अनियमितताएं

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट में अरबों रुपये की धोखाधड़ी, गबन, खरीद संबंधी उल्लंघन और वित्तीय कुप्रबंधन का पता चला है। हालांकि, ऑडिट हस्तक्षेप के बाद केवल 127.27 मिलियन रुपये ही वसूल किए जा सके।

ऑडिट के लिए रिकॉर्ड देने से किया इनकार

डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान नर्सिंग एंड मिडवाइफरी काउंसिल (पीएनएमसी) ने महालेखा परीक्षक और पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय दोनों के निर्देशों के बावजूद ऑडिट के लिए अपने वित्तीय रिकॉर्ड प्रस्तुत करने से इनकार कर दिया। परिषद का कहना था कि वह सरकारी अनुदान के बजाय अपने स्वयं के राजस्व से संचालित एक स्वायत्त निकाय है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

हालांकि, ऑडिट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि परिषद संघीय नियंत्रण में है और इसलिए कानूनी रूप से एजीपी की निगरानी के दायरे में आती है। रिपोर्ट में ऑडिट प्रक्रिया में बाधा डालने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

टीकों की खरीद में 1.1 अरब रुपये से ज्यादा का नुकसान

ऑडिट में संघीय टीकाकरण निदेशालय (एफडीआई) के भीतर खरीद संबंधी अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ। आरोप है कि अधिकारियों ने संघीय कैबिनेट के निर्णयों और खरीद नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण टीकों की खरीद अधिक दरों पर हुई और सरकार को 1.1 अरब रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ।

सरकारी धन निजी बैंक खाते में रखने पर सवाल

एक अन्य महत्वपूर्ण मामला मानव अंग प्रत्यारोपण प्राधिकरण (एचओटीए) से जुड़ा है, जिसने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन अधिनियम के तहत आवश्यक सरकारी एकल खाते में राशि जमा करने के बजाय 38.78 मिलियन रुपये एक वाणिज्यिक बैंक खाते में रखे। ऑडिट ने कहा कि इससे वित्तीय पारदर्शिता कमजोर होती है और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का खतरा बढ़ता है।

पॉलीक्लिनिक अस्पताल की खरीद पर भी उठे सवाल

एचओटीए ने दावा किया कि संबंधित बैंक खाते को पहले वित्त विभाग की मंजूरी मिली थी, लेकिन लेखा परीक्षकों ने पाया कि बाद में लागू वित्तीय नियमों के तहत वह मंजूरी निरस्त हो चुकी थी। रिपोर्ट में इस्लामाबाद के पॉलीक्लिनिक अस्पताल में 508.4 मिलियन रुपये की खरीद अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है, जहां दवाइयों और शल्य चिकित्सा सामग्री की खरीद सरकारी नीति और पर्याप्त दस्तावेजों के बिना स्थानीय स्तर पर की गई।

(एएनआई)

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