पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्

पाकिस्तान में मीडिया स्वतंत्रता पर चिंता, मानवाधिकार आयोग ने राज्य कार्रवाई पर उठाए सवाल

Pakistan Human Rights Commission Raises Concerns Over Crackdown on Media Freedom

इस्लामाबाद,(पाकिस्तान)। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में लगातार हो रही गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार निकाय ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार मुनिज़े जहांगीर के लंबे समय से चल रहे टेलीविजन कार्यक्रम को हटाना कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के व्यापक पैटर्न को दर्शाता है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लगातार बिगड़ती स्थिति

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा कि पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की लगातार बिगड़ती स्थिति से वह "गहराई से चिंतित" है और स्वतंत्र पत्रकारिता पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। आयोग ने पाकिस्तानी सरकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी को बनाए रखने और संपादकीय स्वतंत्रता की रक्षा करने का आग्रह किया। इसने नागरिकों के सूचना के अधिकार और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर सवाल उठाने के अधिकार की रक्षा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

मीडिया की स्वतंत्रता पर लगाए जा रहे व्यापक प्रतिबंध

वरिष्ठ पत्रकार मुनिज़े जहांगीर के लंबे समय से चल रहे कार्यक्रम 'स्पॉटलाइट' को आज उर्दू से हटाए जाने का जिक्र करते हुए, मानवाधिकार आयोग ने कहा कि इस कदम को एक अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि, इसने कहा कि यह घटनाक्रम देश में मीडिया की स्वतंत्रता पर लगाए जा रहे व्यापक प्रतिबंधों के पैटर्न को दर्शाता है। मानवाधिकार संस्था ने आगे कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां इस बढ़ती चिंता को बल देती हैं कि कठिन प्रश्न पूछने वाले या आलोचनात्मक बहस के लिए जगह देने वाले पत्रकारों को मुख्यधारा के मीडिया मंचों से लगातार बाहर किया जा रहा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों की आलोचना

पाकिस्तान को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों द्वारा मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। देश के पत्रकारों ने अक्सर धमकियों, सेंसरशिप, जबरन गायब किए जाने, कानूनी कार्रवाई और राज्य एवं गैर-राज्य दोनों ही पक्षों के दबाव की शिकायत की है। कई टेलीविजन कार्यक्रमों को कथित तौर पर प्रसारण से हटा दिया गया है, जबकि सरकारी नीतियों या शक्तिशाली संस्थानों की आलोचना करने वाले पत्रकारों ने उत्पीड़न और अपने काम पर प्रतिबंधों का आरोप लगाया है।

स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए उपलब्ध स्थान पर चल रही बहस

मीडिया निगरानी संस्थाओं ने बार-बार संपादकीय स्वतंत्रता में कमी, स्व-सेंसरशिप और डिजिटल एवं पारंपरिक मीडिया पर बढ़ते प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त की है। मानवाधिकार समूहों का मानना ​​है कि ये घटनाक्रम स्वतंत्र सूचना तक जनता के पहुंच के अधिकार को कमजोर करते हैं और लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमज़ोर करते हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग द्वारा उठाई गई नवीनतम चिंताएं देश में प्रेस की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए उपलब्ध स्थान पर चल रही बहस को और हवा देती हैं। (एएनआई)

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