पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू, PTI सरकार का नियंत्रण खत्म
इस्लामाबाद (पाकिस्तान)। पाकिस्तान में राजनीतिक संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू किए जाने की खबर है। इस कदम से प्रांतीय सरकार की शक्तियां संघीय सरकार के नियंत्रण में आ गई हैं। इसी बीच, PTI नेताओं ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिया गया है। केंद्र सरकार ने इस फैसले के पीछे बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद से निपटने में प्रांतीय प्रशासन की कथित विफलता का हवाला दिया है, जबकि यह घटनाक्रम केंद्र और PTI के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लेने का दावा
इमरजेंसी की घोषणा के कुछ ही समय बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। KP के सूचना मंत्री शफी जान ने यह दावा किया, जो PTI के 'लॉन्ग मार्च' में मुख्यमंत्री के साथ थे। 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, सोहेल अफरीदी इस विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। हालांकि, मुख्यमंत्री को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सूचना मंत्री के दावे के आधार पर सामने आई है।
प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मोबाइल सेवाएं प्रभावित
गवर्नर शासन लागू होने के बाद पूरे खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। 'डॉन' ने टेलीकॉम सेक्टर के सूत्रों के हवाले से बताया कि कुछ शहरी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और डेटा सेवाओं को धीमा या बंद कर दिया गया था। हालांकि, पूरे प्रांत में संचार नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं किया गया था। पेशावर के आसपास प्रमुख रास्तों पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और शिपिंग कंटेनरों के जरिए बैरिकेड्स लगाए गए।
संघीय सरकार ने नए मुख्य सचिव की नियुक्ति की
प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए संघीय सरकार ने डॉ. मुहम्मद फखर आलम इरफान को खैबर पख्तूनख्वा का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारी मुहम्मद याह्या अखुनजादा का भी प्रांत में तबादला किया गया। इन नियुक्तियों का उद्देश्य संघीय सरकार के निर्देशों के तहत प्रांतीय प्रशासन के कामकाज की निगरानी करना बताया गया है। गवर्नर शासन के फैसले के बाद प्रांत की प्रशासनिक व्यवस्था में ये बदलाव किए गए हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर PTI सरकार पर संघीय कैबिनेट के आरोप
इस्लामाबाद ने संवैधानिक कार्रवाई को सही ठहराते हुए आरोप लगाया कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गई थी। संघीय कैबिनेट की आपात बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने प्रांत में बिगड़ते आतंकवाद के हालात का हवाला दिया। PMO ने PTI के नेतृत्व पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। वहीं, राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सुरक्षा संबंधी खुफिया रिपोर्टों का आकलन करने और सरकारी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत पूरी तरह विफल रहने के आधार पर प्रस्ताव को मंजूरी दी।
केंद्र और PTI सरकार के बीच लंबे समय से जारी तनाव
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू होने को PML-N के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और PTI की प्रांतीय सरकार के बीच लंबे समय से जारी तनाव का अहम पड़ाव माना जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद-रोधी अभियानों और अफगान तालिबान के साथ बातचीत को लेकर मतभेद रहे हैं। 'डॉन' के अनुसार, 3 अक्टूबर को द्विपक्षीय बातचीत विफल होने के बाद टकराव और बढ़ गया। इस्लामाबाद ने प्रांतीय प्रशासन पर चरमपंथी खतरों से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया, जबकि PTI का कहना था कि उसे अहम सुरक्षा नीतियों से एकतरफा तरीके से बाहर रखा जा रहा है।
इस्लामाबाद तक प्रस्तावित मार्च को लेकर भी बढ़ा विवाद
'डॉन' की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और PTI के इस्लामाबाद तक प्रस्तावित विरोध मार्च को देखते हुए खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही थी। सत्ताधारी गठबंधन ने चेतावनी दी थी कि यदि प्रांतीय नेतृत्व 4 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च रद्द करने में विफल रहता है, तो PTI के नेतृत्व वाली सरकार को हटाकर गवर्नर शासन या इमरजेंसी लागू की जा सकती है। इस घटनाक्रम ने केंद्र और प्रांतीय सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया।
इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर निकाला गया था मार्च
PTI का प्रस्तावित लॉन्ग मार्च पार्टी के संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस मार्च को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा। सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद से निपटने की रणनीति और प्रांतीय प्रशासन की भूमिका को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए। इसी राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विवाद के बीच संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। (Source: ANI)
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