पाकिस्तान में विदेशी पत्रकारों पर नए प्रतिबंधों की आलोचना, मीडिया संगठनों ने जताई प्रेस स्वतंत्रता को लेकर चिंता
न्यूयॉर्क (अमेरिका): पाकिस्तान द्वारा विदेशी प्रेस की आवाजाही और रिपोर्टिंग पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मीडिया संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इन नियमों को प्रेस की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय बताया है।
नई गाइडलाइन के तहत अनुमति जरूरी
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी विदेशी मीडिया सुविधा दिशानिर्देश 2026 के अनुसार, विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर आधिकारिक रिपोर्टिंग करने से पहले मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
पत्रकारों के लिए पंजीकरण अनिवार्य
नए नियमों के तहत विदेशी पत्रकारों, मीडिया संस्थानों, स्थानीय सहयोगियों और योगदानकर्ताओं को मंत्रालय में पंजीकरण कराना होगा। वहीं, एबटाबाद और मरी जैसे संवेदनशील इलाकों में जाने वाले विदेशी पत्रकारों को निजी यात्राओं के लिए भी एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
मीडिया संगठनों ने जताई नाराजगी
इन दिशानिर्देशों पर पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे पत्रकारिता पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों सहित कई मुद्दों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।
सीपीजे ने बताया 'प्रेस स्वतंत्रता पर हमला'
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इन दिशानिर्देशों को वापस लेने की मांग की है। सीपीजे के प्रतिनिधि वलीउल्लाह रहमानी ने कहा कि ये नियम अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज को सीमित कर सकते हैं और पत्रकारों को प्रशासनिक कार्रवाई के खतरे में डाल सकते हैं।
अल जज़ीरा की वेबसाइट पर रोक का भी दावा
सीपीजे के अनुसार, ये नियम उस समय लागू किए गए जब पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों की अंतरराष्ट्रीय कवरेज की आलोचना की थी और अल जज़ीरा पर आरोप लगाए थे। संस्था ने दावा किया कि इसके बाद अल जज़ीरा की वेबसाइट तक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई।
पत्रकारों की हिरासत पर भी चिंता
मीडिया निगरानी संस्था ने बताया कि पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कुछ पत्रकारों की हिरासत और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई गई है।
एचआरसीपी ने भी उठाए सवाल
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने भी नए दिशानिर्देशों पर चिंता जताई है। आयोग का कहना है कि ये नियम पत्रकारिता को बढ़ावा देने के बजाय समाचार संकलन पर नौकरशाही नियंत्रण बढ़ाएंगे और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग में बाधा डाल सकते हैं।
स्वतंत्र रिपोर्टिंग की मांग
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से इन प्रतिबंधों को वापस लेने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने की अपील की है। उनका कहना है कि आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।
ANI
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