फैसलाबाद में 13 वर्षीय ईसाई लड़की के कथित अपहरण, ध

पाकिस्तान: 13 वर्षीय ईसाई लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के मामले पर उठे सवाल

Pakistan: Questions Raised Over 13-Year-Old Christian Girl Case

फ़ैसलाबाद [पाकिस्तान]: द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, फ़ैसलाबाद की एक 13 वर्षीय ईसाई लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी के मामले को जिस तरह से संभाला गया है, उस पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक अधिकार अधिवक्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, फ़ैसलाबाद प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यकर्ताओं ने लड़की को अपहरणकर्ता के हवाले करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि नाबालिग को आरोपी के हवाले करने से वह और अधिक धमकियों, दुर्व्यवहार, शोषण और उत्पीड़न का शिकार हो सकती है।

लड़की की सुरक्षा को लेकर चिंता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइनॉरिटीज़ अलायंस पाकिस्तान के अध्यक्ष अधिवक्ता अकमल भट्टी, जोसेफ जानसेन, अधिवक्ता हारून माइकल, सदफ़ अदनान और लड़की की मां नादिया नदीम उपस्थित थे। वक्ताओं ने सरकार, पुलिस और न्यायपालिका से लड़की की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने और आरोपी से उसे छुड़ाने का आह्वान किया। उन्होंने मांग की कि कानूनी कार्यवाही पूरी होने तक बच्ची को या तो उसके माता-पिता के पास रखा जाए या उचित सुरक्षा हिरासत में रखा जाए।

12 जून को हुआ था कथित अपहरण

मामला 12 जून, 2026 का है, जब मोहसिन लियाकत ने कथित तौर पर बच्ची का अपहरण किया था। पुलिस ने रजाबाद पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर बच्ची को बरामद किया और उसे सुरक्षा हिरासत में रखा।

मजिस्ट्रेट के सामने बच्ची ने क्या बताया

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, वह 27 जून को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई और कथित तौर पर बताया कि आरोपी के परिवार के सदस्यों ने उसे सिखाया-पढ़ाया और दबाव डालकर खुद को बालिग के रूप में पेश करवाया था। कार्यकर्ताओं ने आरोपी के परिवार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए, जिनमें कथित तौर पर बच्ची की जन्मतिथि जून 2008 बताई गई थी और उसके कथित धर्म परिवर्तन और विवाह से संबंधित रिकॉर्ड शामिल थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह जानकारी उन सबूतों से मेल नहीं खाती, जिनसे पता चलता है कि उसके माता-पिता का विवाह 2012 में हुआ था, जबकि बच्ची का जन्म 2008 में नहीं हो सकता था, जैसा कि एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया है।

(एएनआई)

यह भी पढ़ें: ट्रंप का कनाडा पर हमला, बोले- मुझे कनाडाई कुछ भी नहीं चाहिए