फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने कहा, कि भ

इजरायल-ईरान तनाव कम कराने में भारत निभा सकता है अहम भूमिकाः अबू शावेश

Palestinian Envoy Says India Can Play a Key Role in Easing Israel-Iran Tensions

नई दिल्ली,(भारत)। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने शुक्रवार को कहा, कि वैश्विक शांति को बढ़ावा देने और विशेष रूप से इज़राइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया, कि अपनी कूटनीतिक स्थिति और वैश्विक प्रभाव के कारण भारत पश्चिम एशिया में स्थिरता स्थापित करने में सार्थक योगदान देने में सक्षम है।

भारत का महत्व सर्वोपरि

अबू शावेश ने कहा, "भारत का महत्व सर्वोपरि है। मेरा मानना है, कि भारत न केवल इज़राइल से जुड़े मौजूदा हालात बल्कि वैश्विक शांति स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। मुझे उम्मीद है, कि भारत अपनी भूमिका को मजबूती से निभाएगा और क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों में सक्रिय योगदान देगा। हमारी स्थिति के संदर्भ में भी भारत पहले की तरह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते पर टिप्पणी

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की संभावना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, कि क्षेत्र में स्थिरता सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन इज़राइल से जुड़े किसी भी युद्धविराम या कूटनीतिक समझौते की स्थिरता को लेकर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं, कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित हो और उसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़े। हालांकि मुझे आशंका है, कि इज़राइल इस संघर्ष को दोबारा शुरू करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।"

संघर्ष का विश्लेषण उसके कारणों, परिस्थितियों और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए

गाजा में जारी मानवीय संकट पर बोलते हुए, फिलिस्तीनी राजदूत ने कहा, कि मौजूदा हालात को केवल हाल की घटनाओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके ऐतिहासिक संदर्भ को भी समझना आवश्यक है। उन्होंने अपने हाल ही में प्रकाशित लेख '7 अक्टूबर: एक हज़ार दिन बाद' का उल्लेख करते हुए कहा, कि किसी भी संघर्ष का विश्लेषण उसके कारणों, परिस्थितियों और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

गाजा के अधिकांश लोग शरणार्थियों के वंशज

उन्होंने उन विश्लेषणों की आलोचना की, जो पूरे संघर्ष की शुरुआत केवल 7 अक्टूबर 2023 से मानते हैं। उनके अनुसार, ऐसा दृष्टिकोण दशकों पुराने कब्ज़े, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय विवादों की अनदेखी करता है। शावेश ने कहा, कि मौजूदा संघर्ष की जड़ें 1917 और 1948 की ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि गाजा की बड़ी आबादी उन शरणार्थियों की पीढ़ियों से संबंधित है, जिन्हें वर्षों पहले अपने घर छोड़ने पड़े थे। उन्होंने कहा, "गाजा के अधिकांश लोग शरणार्थियों के वंशज हैं और उनमें से कई, मेरी तरह, शरणार्थी शिविरों में पैदा हुए हैं। दशकों से हालात लगातार बिगड़ते गए हैं।" (एएनआई)

यह भी पढ़ेंः ईरानी वार्ताकारों को कथित धमकी की रिपोर्ट पर इज़राइल का जवाब, पीएमओ ने बताया 'फर्जी खबर'