रेटिंग एजेंसियों पर गरजे पीयूष गोयल, कहा- 'भारत के साथ किया अन्याय, हमारी क्षमता को नहीं पहचाना'
लंदन (ब्रिटेन): केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में उद्योग जगत के दिग्गजों को संबोधित करते हुए वैश्विक रेटिंग एजेंसियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि फिच (Fitch), मूडीज (Moody's) और एसएंडपी (S&P) जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत के मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और विकास गाथा को पर्याप्त मान्यता नहीं दी है, जो कि देश के साथ एक प्रकार का अन्याय है।
"भारत के साथ अन्याय हुआ है"
लंदन दौरे के दौरान एक व्यापार सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, "मैं बिना किसी हिचकिचाहट के कह सकता हूं कि इन एजेंसियों ने भारत की संप्रभुता और भारतीय क्षमता को उतना नहीं पहचाना जितना एक निष्पक्ष एजेंसी को करना चाहिए था। मैं इसके पीछे के कारणों पर नहीं जाऊंगा, लेकिन इस रवैये पर मुझे आश्चर्य जरूर है।"
भारतीय रेटिंग एजेंसी की पीयूष गोयल ने की तारीफ
उन्होंने भारतीय रेटिंग एजेंसी 'केयरएज' (CareEdge) के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने निष्पक्ष तरीके से भारत का आकलन किया है। गोयल ने बताया कि केयरएज के निष्कर्ष दुनिया के 22 देशों की रेटिंग को बदलने के लिए पर्याप्त हैं, जो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को रेटिंग में निष्पक्षता लाने के अपने प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता और भविष्य की राह
पीयूष गोयल ने 15 जुलाई से लागू होने वाले भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल टैरिफ में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहयोग, समन्वय और साझेदारी का एक नया अध्याय है।
दुनिया का भरोसा और भारत की जिम्मेदारी
उद्योग जगत के नेताओं का आह्वान करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया को भारत पर भरोसा है और यह भरोसा भारत की विकास गाथा का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "अगर एक राष्ट्र के रूप में हम केवल 5, 7 या 10% की वृद्धि दर पर सफलता का दावा करने की घिसी-पिटी सोच में रहेंगे, तो यह उस भरोसे का घोर विश्वासघात होगा जो आज दुनिया हम पर रखती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की औसत वृद्धि दर से कहीं आगे बढ़कर हमें उच्च विकास महत्वाकांक्षा रखनी होगी।"
गोयल का उद्यमियों से आग्रह- अनछुए क्षेत्रों में करें विस्तार
गोयल ने ब्रिटिश और भारतीय उद्यमियों से आग्रह किया कि वे अब तक के अनछुए क्षेत्रों में विस्तार करें। उन्होंने कहा कि भारत न केवल तैयार है, बल्कि भारत को कर दिखाना ही होगा। यह दौरा भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और निवेश के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।