CBAM और इंपोर्ट ड्यूटी पर पीयूष गोयल ने उठाए सवाल, यूरोप को दी चेतावनी
बर्लिन: यूनियन कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने गुरुवार को स्टील पर यूरोपियन यूनियन के कार्बन टैक्स की आलोचना करते हुए कहा कि यह ग्रुप एक्स्ट्रा कॉस्ट लगाकर तबाही को न्योता दे रहा है, जिससे रहने का खर्च बढ़ सकता है और इसकी इंडस्ट्रीज़ की कॉम्पिटिटिवनेस कम हो सकती है। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग को एड्रेस करते हुए, गोयल ने कहा कि EU का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और दूसरी रेगुलेटरी पाबंदियां स्टील और दूसरे इंडस्ट्रियल मटीरियल की कॉस्ट बढ़ा सकती हैं, जिससे यूरोपियन बिज़नेस और कंज्यूमर्स पर बुरा असर पड़ सकता है। गोयल ने कहा, आप खुद पर CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) लगाते हैं। आप अपने देश में स्टील लाने के लिए 50 परसेंट इंपोर्ट ड्यूटी लगाते हैं। आप तबाही को न्योता दे रहे हैं। आपके रहने का खर्च बढ़ जाएगा।
एल्युमीनियम और सीमेंट से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर पड़ेगा असर
उन्होंने तर्क दिया कि बढ़ते रेगुलेशन यूरोपियन इंडस्ट्रीज़ पर बोझ बढ़ा रहे हैं और उन्हें ग्लोबल मार्केट में कम कॉम्पिटिटिव बना रहे हैं। मिनिस्टर ने कहा, हमने गिनती खो दी है। आप अपने रेगुलेशन बढ़ाते रहते हैं, अपनी इंडस्ट्री का बोझ बढ़ाते हैं, खुद को अनकॉम्पिटिटिव बनाते हैं। गोयल ने चेतावनी दी कि स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट की ज़्यादा कीमतों का पूरे यूरोप में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिसमें पोर्ट, एयरपोर्ट, हाईवे और यूटिलिटीज़ शामिल हैं। उन्होंने कहा, अब आगे सोचिए, हर इंफ्रास्ट्रक्चर, चाहे वह पोर्ट हो या एयरपोर्ट या जर्मनी में आपके ऑटोबान हों या आपके एक्सप्रेसवे, आपकी यूटिलिटीज़, आपकी पानी की पाइपलाइनें, आप जिस इंफ्रास्ट्रक्चर का नाम लेते हैं, उसमें महंगा स्टील, महंगा एल्युमीनियम, महंगा सीमेंट, CBAM और पेड़ों की कटाई के नियम सब कुछ शामिल होगा।
बिजनेस और ऑटो इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा असर
मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि रेगुलेटरी पाबंदियों के कारण ट्रेडिंग पार्टनर्स भी जवाबी कदम उठा सकते हैं, जिससे यूरोप के बिज़नेस को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा, इस जवाबी दुनिया में आप एक रेगुलेशन लाते हैं और किसी दूसरे देश को आपके साथ काम करने से रोकते हैं। वे दो रेगुलेशन लाएंगे, जिससे आपके बिज़नेस को नुकसान होगा। पीयूष गोयल ने कहा कि ऐसे उपायों का कुल असर यूरोप में रहने का खर्च बढ़ा सकता है, महंगाई बढ़ा सकता है और इसकी इंडस्ट्रीज़ की कॉम्पिटिटिवनेस को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने कहा, आप ग्लोबल मार्केट में मुकाबला नहीं कर पाएंगे। आपकी ऑटो इंडस्ट्री पहले से ही इससे जूझ रही है।
भारत ने EU के CBAM नियमों पर जताई चिंता
मंत्री ने कहा कि इस बीच भारत अपनी कॉम्पिटिटिवनेस को मज़बूत करने और दुनिया भर के देशों के साथ बैलेंस्ड ट्रेड पार्टनरशिप बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा, जिन भी पार्टनर के साथ हम काम कर रहे हैं, उनके साथ हमारे फेयर, इक्विटेबल और बैलेंस्ड एग्रीमेंट हैं। इसके साथ ही कहा कि भारत कॉम्पिटिटिवनेस और कॉम्प्लिमेंट्री ताकतों के आधार पर पार्टनरशिप बना रहा है। भारत ने EU के CBAM पर चिंता जताई है, जिसमें स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे कार्बन-इंटेंसिव इंपोर्ट शामिल हैं। इस सिस्टम के तहत इंपोर्टर्स को यूरोपियन मार्केट में आने वाले कुछ सामानों में मौजूद एमिशन का हिसाब रखना होता है, जिससे एक्सपोर्टर्स में एक्स्ट्रा कम्प्लायंस कॉस्ट और संभावित ट्रेड रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है। पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि दुनिया की लगभग 17 प्रतिशत आबादी को सपोर्ट करने के बावजूद भारत ग्लोबल कार्बन एमिशन का सिर्फ़ 3-3.5 प्रतिशत हिस्सा है।
(इनपुट: ANI)
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