पोप लियो XIV ने फोर्ट हुड शूटर निदाल मलिक हसन को फ

पोप लियो ने निदाल हसन को मौत की सजा देने की ट्रंप की मंजूरी की आलोचना की, बताया गरिमा पर हमला

Pope Leo XIV (File photo)

वैटिकन सिटी। वैटिकन सिटी से सामने आए एक अहम बयान में पोप लियो XIV ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले की तीखी आलोचना की है, जिसके तहत फोर्ट हुड के दोषी शूटर निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने की मंजूरी दी गई है। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मृत्युदंड (Capital Punishment) के औचित्य और मानवीय गरिमा को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।

पोप का तीखा विरोध और सोशल मीडिया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने संदेश में पोप ने दो टूक शब्दों में कहा कि न्याय और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे लक्ष्यों को मौत की सजा का सहारा लिए बिना भी पूरी तरह सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने ऐसी आधुनिक हिरासत प्रणालियों की वकालत की जो एक ओर जहां नागरिकों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, वहीं अपराधियों के भीतर सुधार की गुंजाइश को भी जिंदा रखती हैं।

अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए पोप लियो XIV ने स्पष्ट किया, "मौत की सजा अस्वीकार्य है क्योंकि यह व्यक्ति की अत्तानीयता और गरिमा पर सीधा हमला है। आम भलाई की रक्षा की जा सकती है और न्याय की जरूरतों को बिना मृत्युदंड के पूरा किया जा सकता है: ऐसी प्रभावी हिरासत प्रणालियां विकसित की गई हैं जो नागरिकों की सुरक्षा करती हैं और साथ ही दोषियों को सुधार की संभावना से पूरी तरह वंचित नहीं करती हैं। #NoDeathPenalty"

पेंटागन और ट्रंप प्रशासन का फैसला

पोप की यह कड़ी प्रतिक्रिया अमेरिकी सेना द्वारा सोमवार को की गई उस आधिकारिक घोषणा के बाद आई है, जिसमें बताया गया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी युद्ध सचिव (US War Secretary) पीट हेगसेथ की सिफारिश पर अमल करते हुए हसन को फायरिंग स्क्वाड से मृत्युदंड देने की मंजूरी दे दी है।

पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने 'एक्स' पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सिफारिश की है, और राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने दोषी आतंकवादी निदाल मलिक हसन को अमेरिकी सेना के फायरिंग स्क्वाड द्वारा मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है।"

पार्नेल ने आगे जानकारी देते हुए लिखा, "सेना सचिव (Secretary of the Army) इस सजा के सटीक समय और स्थान का निर्धारण करेंगे। हसन के लिए फैसले का दिन आखिरकार आ गया है।"

<blockquote lang="en" dir="ltr">The death penalty is inadmissible because it is an attack on the inviolability and dignity of the person. The common good can be safeguarded and the requirements of justice can be met without recourse to capital punishment: effective systems of detention have been developed that protect citizens while at the same time do not completely deprive those who are guilty of the possibility of redemption. #NoDeathPenalty</p>&mdash; Pope Leo XIV (@Pontifex) <a href="https://x.com/Pontifex/status/2108882737792745846?ref_src=twsrc%5Etfw">October 10, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

क्या है फोर्ट हुड गोलीबारी का पूरा मामला?

सेना में मेजर के पद पर तैनात निदाल मलिक हसन को 5 नवंबर 2009 को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य ठिकाने पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का दोषी करार दिया गया था। इस भीषण नरसंहार में 13 लोगों की जान चली गई थी और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस जघन्य अपराध के बाद, 2013 में एक सैन्य जूरी (Military Jury) ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।

यह खूनी संघर्ष सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर एक मेडिकल बिल्डिंग में अंजाम दिया गया था, जो उन दिनों इराक और अफगानिस्तान में तैनाती के लिए जाने वाले अमेरिकी सैन्य कर्मियों का प्रमुख ट्रांजिट और स्टैगिंग एरिया हुआ करता था। मारे गए 13 लोगों में 12 सैनिक थे जबकि एक नागरिक शामिल था।

कोर्ट-मार्शल और अल-क़ायदा कनेक्शन

अपनी सुनवाई और कोर्ट-मार्शल के दौरान हसन ने किसी वकील की मदद लेने के बजाय खुद अपना पक्ष रखा था। उसने न तो कोई गवाह पेश किया, न गवाही दी और न ही औपचारिक आरोपों का कोई विरोध किया था। हालांकि, उसके कोर्ट-नियुक्त बचाव पक्ष के वकीलों ने पहले ही आशंका जताई थी कि वह जानबूझकर मृत्युदंड की सजा हासिल करने की फिराक में है।

अभियोजन पक्ष (Prosecutors) ने ट्रायल के दौरान पुख्ता सबूतों के साथ तर्क दिया था कि यह पूरा हमला खूंखार आतंकवादी संगठन अल-क़ायदा की विचारधारा से प्रेरित था। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, हसन इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों का मुखर विरोधी था और उसने यमन में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए अल-क़ायदा से जुड़े अमेरिकी मूल के कट्टरपंथी उपदेशक अनवर अल-अवलाकी के साथ ऑनलाइन संपर्क साधा था।

दशकों बाद अमेरिकी सेना में मृत्युदंड का मामला

यदि यह सजा पूरी तरह निष्पादित होती है, तो यह कई दशकों में अमेरिकी सेना द्वारा दी जाने वाली पहली मौत की सजा होगी। अमेरिकी सेना ने आखिरी बार साल 1961 में मृत्युदंड दिया था, और तब से लेकर अब तक सेना द्वारा 'फायरिंग स्क्वाड' की पद्धति का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

पोप लियो XIV का यह बयान कैथोलिक चर्च के उस पारंपरिक रुख को मजबूती से दोहराता है जो गंभीर से गंभीर अपराधों के मामलों में भी मानवीय गरिमा की रक्षा और कैदियों के भीतर सुधार की संभावनाओं को सर्वोपरि मानता है।

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