पाकिस्तान के पंजाब में सरकारी स्कूलों का निजीकरण बना संकट: बुनियादी सुविधाएं ठप, शिक्षकों के शोषण के आरोप
रावलपिंडी (पाकिस्तान)। पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण (आउटसोर्सिंग) ने एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है। सरकार द्वारा 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' के तहत हजारों सरकारी स्कूलों को निजी ऑपरेटरों को सौंपे जाने के बाद से स्कूलों की बुनियादी स्थिति सुधरने के बजाय और अधिक बदतर हो गई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में रावलपिंडी समेत पूरे पंजाब में करीब 13,000 स्कूलों को आउटसोर्स किया गया है। इस नीति के कारण न केवल स्कूलों का बुनियादी ढांचा ढह रहा है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रशासनिक विफलताएं और शिक्षकों के आर्थिक शोषण के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा के अधिकार पर खतरा मंडराने लगा है।
निजीकरण से चरमराई व्यवस्था और कम लागत की क्रूर नीति
शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों और शिक्षक संगठनों का आरोप है कि निजी प्रबंधन ने मुनाफा कमाने और लागत कम करने के लिए क्रूर रास्ते अपनाए हैं। सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसने इस बदहाली को पूरी दुनिया के सामने ला दिया। इस वीडियो में देखा गया कि बिजली का बिल बचाने के लिए जलती गर्मी के दौरान कक्षाओं के चलते समय सीलिंग फैन (छत के पंखे) बंद कर दिए गए थे। इस घटना के बाद चौतरफा आक्रोश फैला और स्कूल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
इसके अलावा, 'स्कूल्स एजुकेशन पेंशनर्स एसोसिएशन' और 'पंजाब टीचर्स यूनियन' जैसे बड़े संगठनों ने नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस व्यवस्था ने शिक्षकों के कामकाजी माहौल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधि ने कहा, "मैट्रिक और इंटरमीडिएट योग्यता वाली महिला शिक्षकों को महज 7,000 से 10,000 पाकिस्तानी रुपये ($25-$35 USD के करीब) मासिक वेतन पर रखा जा रहा है। विडंबना यह है कि उनसे 17,000 रुपये की रसीद पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जबकि छात्रों से फीस भी वसूली जा रही है।"
मुफ्त शिक्षा के संवैधानिक अधिकार पर आघात
यूनियन प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों का तर्क है कि सरकारी स्कूलों को निजी ऑपरेटरों को सौंपने की यह निरंतर प्रक्रिया देश के निम्न-आय वर्ग के परिवारों को शिक्षा से दूर कर रही है। पाकिस्तान के संविधान के तहत नागरिकों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य की जिम्मेदारी है, लेकिन इस अंधाधुंध निजीकरण से सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की नींव कमजोर हो रही है। शिक्षक संगठनों ने पंजाब सरकार से इस निजीकरण को तुरंत रोकने की मांग की है।
केवल 2,973 स्कूलों में तैनात हैं स्थायी हेडमास्टर या प्रिंसिपल
इस आउटसोर्सिंग के समानांतर, प्रांत की प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह पंगु नजर आ रही है। पंजाब के शिक्षा विभाग के तहत आने वाले 9,217 उच्च शिक्षण संस्थानों में से केवल 2,973 स्कूलों में ही स्थायी हेडमास्टर या प्रिंसिपल तैनात हैं। शेष 6,244 संस्थान कार्यवाहक या अस्थायी प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे दैनिक प्रशासनिक निर्णय और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। (Source: ANI)
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