पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पाकिस्तान के कब्

PTI ने PoJK चुनावों को बताया ‘पूर्वनिर्धारित’, हिंसा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग

PTI Calls PoJK Polls Pre-Planned

मुज़फ़्फ़राबाद (PoJK): पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हुए हालिया चुनावों को खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया को "धोखाधड़ी" और "पूर्वनिर्धारित" बताया है। पार्टी ने क्षेत्र में हुई हिंसा और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, PTI ने आरोप लगाया कि चुनाव पहले से तय थे और पार्टी ने इसी वजह से इनका बहिष्कार किया था। PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व प्रधानमंत्री सरदार कय्यूम नियाज़ी ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहले से तय था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को सत्ता सौंपी जाएगी और राजनीतिक व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

हिंसा की घटनाओं पर जताई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट, मीरपुर और क्षेत्र के अन्य हिस्सों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें अशांति और झड़पों के दृश्य दिखाए गए हैं। हालांकि, इन घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सुरक्षा बलों और प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) दोनों ने अपने-अपने पक्ष में नुकसान और हताहतों का दावा किया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) और विपक्षी दलों ने कथित मौतों और घायलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। नियाज़ी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के लोग उत्पीड़न और अत्याचार का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की कोशिश की, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।

तीन चरणों में चुनाव कराने पर सवाल

नियाज़ी ने PoJK में तीन चरणों में चुनाव कराने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आबादी करीब 35 से 40 लाख है, जबकि पाकिस्तान जैसे बड़े देश में चुनाव एक चरण में कराए जाते हैं। उन्होंने पूछा कि इतने छोटे क्षेत्र में तीन चरणों में चुनाव कराने की जरूरत क्यों पड़ी।

बल प्रयोग का किया विरोध

PTI नेता ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं होना चाहिए था। उन्होंने अधिकारियों से स्थिति को संभालने के तरीके पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि हिंसा के कारण पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो रही है और कश्मीर मुद्दे पर बोलने की स्थिति कमजोर हो रही है।

(एएनआई)

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