रुबियो की भारत यात्रा पर नजर, रिलायंस के 300 अरब डॉलर के टेक्सास प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने की कोशिश: विशेषज्ञ
नई दिल्ली: विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव का मानना है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की जामनगर और मुंबई की आगामी यात्रा के पीछे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक उद्देश्य हो सकते हैं। उनके अनुसार, इस यात्रा का एक प्रमुख मकसद टेक्सास में रिलायंस इंडस्ट्रीज की प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना से जुड़े समझौते को अंतिम रूप देना हो सकता है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को आगामी मध्यावधि चुनावों में राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है। बातचीत में सचदेव ने भारत और अमेरिका के बीच जारी राजनीतिक तथा कारोबारी संबंधों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि रुबियो की यात्रा दोनों देशों के संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन जामनगर को यात्रा में शामिल किए जाने के पीछे के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यात्रा निश्चित रूप से अमेरिका-भारत संबंधों के लिए एक अच्छा संकेत है। अन्य बातों के अलावा, उनकी यात्रा और उसके उद्देश्यों को लेकर मेरी एक शंका है। मैं यह पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं कि वे जामनगर क्यों जा रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है।”
रिलायंस की टेक्सास रिफाइनरी परियोजना पर नजर
आगामी कारोबारी निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए सचदेव ने कहा कि रुबियो अमेरिका में रिफाइनरी स्थापित करने के लिए रिलायंस के साथ हुए समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ट्रंप ने टेक्सास के ब्राउनस्विले में रिलायंस के साथ 300 अरब अमेरिकी डॉलर की परियोजना की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि 300 अरब डॉलर की यह राशि केवल रिफाइनरी में निवेश की रकम नहीं है। उनके अनुसार, रिफाइनरी में वास्तविक निवेश लगभग 5 अरब डॉलर है। मार्च 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के ब्राउनस्विले बंदरगाह पर प्रस्तावित 'अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग' परियोजना के लिए भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ 300 अरब अमेरिकी डॉलर की साझेदारी की घोषणा की थी।
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिल सकता है फायदा
अमेरिका के घरेलू राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए सचदेव ने कहा कि मध्यावधि चुनावों के बीच रिपब्लिकन पार्टी को कई सीनेट सीटों पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि टेक्सास जैसी पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन समर्थक सीट पर भी मुकाबला चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सचदेव के मुताबिक, रुबियो इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि ट्रंप कुछ ही दिनों में रिलायंस के नए निवेश की आधिकारिक घोषणा कर सकें। उन्होंने कहा कि इससे टेक्सास के रिपब्लिकन उम्मीदवार को मतदाताओं के सामने निवेश और रोजगार के अवसरों का मुद्दा उठाने का मौका मिलेगा। ब्राउनस्विले में बड़ी संख्या में लातिनो मतदाता और निर्माण क्षेत्र के श्रमिक रहते हैं, इसलिए परियोजना की घोषणा चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है।
ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवार को राजनीतिक लाभ की उम्मीद
सचदेव ने कहा कि रिफाइनरी परियोजना की घोषणा से ट्रंप और टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार पैक्सटन को यह दावा करने का अवसर मिल सकता है कि उनकी नीतियों से निवेश और रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सेक्रेटरी रुबियो की यह यात्रा रिलायंस द्वारा टेक्सास में इस रिफाइनरी में निवेश की आधिकारिक घोषणा को अंतिम रूप देने और प्राप्त करने के लिए है। इससे ट्रंप और टेक्सास से रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार पैक्सटन को यह दावा करने का मौका मिलेगा कि वे निवेश और रोजगार ला रहे हैं।” हालांकि, सचदेव ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर इस यात्रा के दौरान कितनी प्रगति होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
जयशंकर से मुलाकात में क्षेत्रीय मुद्दों पर भी होगी चर्चा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापक कूटनीतिक संबंधों पर बात करते हुए सचदेव ने कहा कि रुबियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी के अलावा व्यापार और बड़े कारोबारी समझौतों पर भी अधिक जोर दे रहा है। उनके अनुसार, व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी को अलग-अलग या एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता बड़े वाणिज्यिक सौदों पर दिखाई देती है।
19-20 अक्टूबर को मुंबई में होगी उच्चस्तरीय बैठक
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी करेंगे। इसके अलावा, 20 अक्टूबर को वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत करेंगे और अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यूएई के विदेश मंत्री की यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करने का अवसर देगी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष ऊर्जा, व्यापार, निवेश, वित्तीय प्रौद्योगिकी, रक्षा और संपर्क सुविधाओं से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी। अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की यह यात्रा जयशंकर की 14 से 16 अक्टूबर तक हुई यूएई की आधिकारिक यात्रा के बाद हो रही है। उस दौरान उन्होंने यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत की थी और रायसीना मिडिल ईस्ट कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर
मार्को रुबियो की आगामी यात्रा के बारे में जायसवाल ने कहा कि इससे दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के नए तरीकों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों सहित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। दोनों पक्ष क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रुबियो अगले सप्ताह मुंबई और जामनगर की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात कर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करने तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इसके अलावा, वह कारोबारी नेताओं के साथ बैठकें करेंगे, जिनका उद्देश्य वाणिज्यिक निवेश और आर्थिक सहयोग के अवसरों को बढ़ावा देना होगा।
दिल्ली के बाहर बैठकें आयोजित करने की परंपरा
द्विपक्षीय बैठकों के लिए मुंबई को चुने जाने के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि पिछले लगभग एक दशक से भारत विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी दिल्ली के बाहर भी करता रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने वडोदरा में स्पेन के प्रधानमंत्री, अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री की मेजबानी की थी। इसके अलावा, विदेश मंत्री ने गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक, गुजरात के केवड़िया में बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी और अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन आयोजित किया था।
(एएनआई)
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