तालिबान ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में सक्रिय होन

तालिबान ने खारिज किया पाकिस्तान का दावा, कहा- अफगानिस्तान में नहीं है जैश प्रमुख मसूद अजहर

Masood Azhar (File Photo)

नई दिल्ली। तालिबान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के संस्थापक मसूद अजहर के अफगानिस्तान में सक्रिय होने के पाकिस्तान के बार-बार किए जा रहे दावों को खारिज कर दिया है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अजहर उनके देश में मौजूद नहीं है। काबुल ने दोहराया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।

पाकिस्तान पर FATF की निगरानी का रहा दबाव

पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि अजहर अफगानिस्तान भाग गया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की ओर से आतंकवादी संगठनों और उनके नेतृत्व के खिलाफ कार्रवाई करने के दबाव का सामना कर रहा है। पेरिस स्थित वैश्विक निगरानी संस्था FATF की आगामी पूर्ण बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद रोधी प्रयासों की समीक्षा होने वाली है।

अजहर भारत में कई आतंकी मामलों में वांछित

भारत में अजहर कई बड़े आतंकवादी हमलों के मामलों में वांछित है। इनमें 2001 में संसद पर हुआ हमला, 2008 के मुंबई हमले, 2016 में पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हमला और 2019 में पुलवामा में हुआ आतंकी हमला शामिल हैं। पाकिस्तान को धनशोधन रोधी व्यवस्था में प्रणालीगत कमियों और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने में विफल रहने के कारण 2018 से 2022 के बीच FATF की 'ग्रे सूची' (निगरानी सूची) में रखा गया था।

आतंकी नेटवर्क की फंडिंग बनी बड़ी चिंता

FATF के कार्यों पर नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक, पाकिस्तान के खिलाफ प्रमुख चिंताओं में आतंकवादी संगठनों, खासकर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क के वित्तपोषण पर रोक लगाने में उसकी विफलता शामिल थी। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों और अन्य लोगों पर लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी कमियां पाई गई थीं।

ग्रे सूची से निकलने के लिए पाकिस्तान ने उठाए कदम

'ग्रे सूची' से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा तथा उनसे जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगाना और इन संगठनों के नेताओं को दोषी ठहराना शामिल था। पाकिस्तान ने 2021 में जिन लोगों को उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराया था, उनमें मसूद अजहर भी शामिल था। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।

FATF से बाहर निकलने के बाद APG की निगरानी जारी

पाकिस्तान को 2022 में इस शर्त पर FATF की ग्रे सूची से बाहर निकलने की अनुमति दी गई थी कि धन शोधन पर एशिया/प्रशांत समूह (APG) कुछ निर्धारित बिंदुओं पर उसके प्रदर्शन और प्रयासों की लगातार समीक्षा करता रहेगा। FATF के अनुरोध पर जिन मुद्दों को लेकर एपीजी पाकिस्तान की समीक्षा करता रहा है, उनमें मसूद अजहर को गिरफ्तार करने के उसके लगातार जारी प्रयास भी शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव घटने पर कार्रवाई धीमी होने का दावा

इस मामले पर नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक, FATF की निगरानी सूची से बाहर निकलने के बाद जब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और निगरानी कम हो गई, तो उसने सूची से बाहर आने के लिए किए गए अपने आश्वासनों पर अमल करना कम कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अजहर को गिरफ्तार करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और दावा करता रहा कि वह देश में मौजूद ही नहीं है।

तालिबान पहले भी अजहर की मौजूदगी से कर चुका इनकार

इस्लामाबाद का दावा है कि अजहर मई 2019 में डूरंड रेखा पार कर अफगानिस्तान भाग गया था और तब से फरार है। सितंबर 2022 में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने भी इस बात से इनकार किया था कि अजहर अफगानिस्तान में मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अजहर की मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक सूचना या पत्राचार नहीं किया है।

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