पाकिस्तान: हाफ़िज़ाबाद के स्कूल में किताबों का अकाल, शासन व्यवस्था पर उठे सवाल
हाफ़िज़ाबाद (पाकिस्तान)। हाफ़िज़ाबाद के डेनिश स्कूल में सैकड़ों छात्राओं को गंभीर शैक्षणिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें सरकार की नीति के तहत वादा की गई निशुल्क पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। स्थानीय मीडिया द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक यह संस्थान जिले के सबसे बड़े स्कूलों में से एक है। यहां करीब 1,800 छात्र पढ़ते हैं लेकिन मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए जरूरी किताबें अभी तक नहीं मिली हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और भेदभाव के आरोप
यह देरी प्रशासनिक अक्षमता, प्रक्रियात्मक बाधाओं और जिला शिक्षा अधिकारियों, विशेषकर शिक्षा सीईओ के कार्यालय द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार की वजह से हुई है। किताबों की कमी से कक्षा में पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है और छात्राएं पाठ्यक्रम के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही हैं। कई अभिभावकों ने नाराजगी जताई है और कहा है कि बढ़ती महंगाई के कारण वे बाजार से किताबें खरीदने में सक्षम नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार का मुफ्त शिक्षा सामग्री देने का वादा पूरा नहीं हुआ। इससे पहले से ही परेशान परिवारों पर और बोझ पड़ रहा है।
बेहतर सुविधाओं के बावजूद बुनियादी संसाधनों की कमी
हालांकि यह स्कूल पंजाब सरकार के मानकों पर खरा उतरता है। जैसे मेरिट के आधार पर प्रवेश, आधुनिक ढांचा, और अच्छी तरह से सुसज्जित विज्ञान और कंप्यूटर लैब, फिर भी बुनियादी शैक्षणिक सामग्री की कमी के कारण यह प्रभावी शिक्षा देने में संघर्ष कर रहा है। स्कूल के अधिकारियों ने आरोप लगाए कि जिला शिक्षा अधिकारी अन्य संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे अभिभावकों और स्कूल प्रशासन की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
पारदर्शिता और जांच की उठी मांग
इस कथित उपेक्षा ने जिले में संसाधनों के बंटवारे में निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों, स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उच्च शिक्षा अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप करने और समय पर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने देरी की पारदर्शी जांच और लापरवाही या गलत आचरण साबित होने पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
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