दुनिया संभावित रूप से रिकॉर्डतोड़ और तेजी से विकसि

दुनिया पर मंडरा रहा रिकॉर्डतोड़ अल नीनो का खतरा, बढ़ेगा वैश्विक तापमान

सबसे शक्तिशाली अल नीनो की आहट (File Photo)

मेलबर्न: दुनिया इतिहास के सबसे शक्तिशाली अल नीनो का सामना करने के लिए तैयारी कर रही है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां अत्यधिक और असामान्य मौसम की घटनाओं का खतरा बहुत बढ़ गया है। यह अनुमान उन आंकड़ों पर आधारित है, जो संकेत देते हैं कि मौजूदा अल नीनो पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा।

तेजी से विकसित हो रहा असाधारण अल नीनो

अल नीनो प्राकृतिक रूप से होने वाली एक मौसमी घटना है, जो प्रशांत महासागर में तापमान और हवाओं में बदलाव लाती है और दुनियाभर के मौसम को प्रभावित करती है। दुनियाभर में हमने अतीत में कई शक्तिशाली अल नीनो का सामना किया है, लेकिन इनमें से कोई भी इतना असाधारण रूप से शक्तिशाली और इतनी तेजी से विकसित होने वाला नहीं रहा है, जितना यह है। इस संभावित रिकॉर्ड-तोड़ अल नीनो के पीछे क्या कारण है? और इसका दुनियाभर के मौसम पर क्या असर पड़ सकता है? वैज्ञानिक भूमध्य रेखा के पास उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के तापमान के आंकड़ों का उपयोग करके अल नीनो की गतिविधि पर नजर रखते हैं। ऐतिहासिक रूप से, इसमें यह मापना शामिल रहा है कि इस क्षेत्र में तापमान कितना अधिक या कम था।

जल्दी चरम पर पहुंच रहा अल नीनो

हालांकि, वैज्ञानिक और मौसम संबंधी संगठन पहले सिर्फ यह देखते थे कि प्रशांत महासागर का तापमान कितना बढ़ा या घटा है, लेकिन अब वे एक ऐसा सापेक्ष सूचकांक इस्तेमाल करते हैं, जो यह भी ध्यान में रखता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का तापमान पहले से ही सामान्य से अधिक गर्म हो रहा है। इससे वैज्ञानिकों के लिए गर्म होती जलवायु में अल नीनो की तीव्रता का पता लगाना काफी आसान हो जाता है। मौजूदा अल नीनो दो मुख्य कारणों से अलग है। अल नीनो आमतौर पर नवंबर और जनवरी के बीच अपने चरम पर पहुंचता है, लेकिन इस बार मौसम की इतनी शुरुआती अवधि में ही यह असामान्य रूप से गर्म है और अभी गर्मियों के दौरान अपने चरम पर पहुंचना बाकी है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त में सापेक्ष सूचकांक औसत से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक था, जो अल नीनो वाले अन्य वर्षों की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 

अल नीनो से बढ़ेगा वैश्विक तापमान

अल नीनो वाले वर्षों में आमतौर पर अधिक गर्म और शुष्क परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। हालांकि, हर अल नीनो अलग होता है। इसके प्रभाव भी अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह अल नीनो 2027 में वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड टूटने का कारण बनेगा। यह ऐतिहासिक अल नीनो पहले से ही दुनियाभर के मौसम में बदलाव ला रहा है। इसके सबसे सीधे और गंभीर प्रभाव प्रशांत महासागर के आसपास स्थित देशों में देखने को मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में इसी महीने बड़े पैमाने पर जंगलों में लगी आग से जूझना पड़ा। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा अल नीनो भीषण आग की इन बढ़ती हुई घटनाओं का एक प्रमुख कारण है।

अल नीनो से प्रशांत में चक्रवातों की गतिविधि बढ़ी

अल नीनो चक्रवातों के बनने के तरीके और उनके बनने की जगह को भी बदल रहा है। उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों से पता चलता है कि इस समय प्रशांत महासागर में जापान के पास से लेकर सुदूर हवाई तक, चार सक्रिय उष्णकटिबंधीय चक्रवात मौजूद हैं। यह बेहद असामान्य है। अल नीनो आमतौर पर गर्म पानी को पूर्वी और मध्य प्रशांत क्षेत्रों तक पहुंचाकर वहां चक्रवातों की गतिविधि बढ़ाता है। आमतौर पर हमें ऐसे केवल एक या दो चक्रवात ही देखने को मिलते हैं। ऑस्ट्रेलिया में हम अल नीनो के प्रभावों से थोड़े अधिक दूर हैं। हालांकि, जैसे-जैसे हम वसंत ऋतु की ओर बढ़ेंगे, हमें इसका असर अधिक स्पष्ट रूप से महसूस होने की उम्मीद है। 

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ी गर्मी और सूखापन

मौसम विज्ञान ब्यूरो के पूर्वानुमान के अनुसार, अब तक ऑस्ट्रेलिया में अल नीनो का प्रभाव बिल्कुल वैसा ही रहा है, जैसा आमतौर पर देखने को मिलता है। तापमान बढ़ रहा है- इस सप्ताह उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में मौसम के सामान्य समय से हटकर तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और परिस्थितियां अधिक शुष्क होती जा रही हैं। बढ़ती हुई तीव्रता वाला अल नीनो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और गंभीर कर सकता है। अल नीनो जैसे-जैसे मजबूत होगा, दुनियाभर के देशों को लगातार बढ़ते प्रतिकूल मौसम से जूझने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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