पाकिस्तान में बाजार जल्दी बंद करने के आदेश का व्यापारियों ने किया विरोध
रावलपिंडी (पाकिस्तान)। शहर भर के व्यापारियों और व्यापारिक संगठनों ने पाकिस्तानी सरकार के उस निर्देश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें बाजारों को रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने इस फैसले को आर्थिक गतिविधियों और लोगों की आजीविका के लिए नुकसानदायक बताया है।
सरकार के फैसले को बताया व्यापार के लिए नुकसानदायक
स्थानीय मीडिया द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोती बाजार, राजा बाजार, बारा बाजार, सदर और मुर्री रोड सहित प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने इस फैसले को एकजुट होकर खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय अनुचित है और व्यापार के लिए नुकसानदायक है। अलग-अलग व्यापारी संगठन के नेताओं ने कहा कि यह नीति ऐसे समय में स्थानीय कारोबार को निशाना बना रही है, जब व्यापार पहले से ही दबाव में है। उन्होंने इस फैसले को दमनकारी बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी पाबंदियां पहले से कमजोर बाजारों को और नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मुख्य रूप से शाम के समय होता है फूड सेक्टर का काम
इसी बीच, रेस्टोरेंट्स, कैटरर्स, स्वीट्स एंड बेकर्स एसोसिएशन ने भी सरकार के उस आदेश की आलोचना की है जिसमें खाने-पीने की दुकानों को रात 10 बजे तक बंद करने को कहा गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुहम्मद फारूक चौधरी ने कहा कि ऊर्जा की बचत जरूरी है, लेकिन यह लोगों की रोजी-रोटी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फूड सेक्टर का काम मुख्य रूप से शाम के समय होता है और खासकर गर्मियों में कारोबार का सबसे ज्यादा समय रात 10 बजे के बाद होता है।
सरकार से इस नीति पर दोबारा विचार करने की अपील
चौधरी ने मौजूदा चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उद्योग पहले से ही महंगी बिजली, गैस की कमी, ज्यादा टैक्स और बढ़ते खर्चों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उनका कहना है कि जल्दी बंद करने का नियम लागू करने से कई कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। इससे मालिकों के साथ-साथ वेटरों, शेफ और डिलीवरी स्टाफ समेत लाखों कामगार प्रभावित होंगे। एसोसिएशन ने सरकार से इस नीति पर दोबारा विचार करने और संबंधित पक्षों से बातचीत कर व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फूड इंडस्ट्री लाखों परिवारों का सहारा है। अचानक लिए गए फैसलों से इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
व्यापारी नेताओं ने किया संयुक्त बैठक बुलाने का ऐलान
वहीं, नवीन कंवल, हम्माद कुरैशी, शेख नदीम और अकबर खान जैसे व्यापारी नेताओं ने संयुक्त बैठक बुलाने का ऐलान किया है। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। वे संघीय और प्रांतीय सरकारों को एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें इस नीति के आर्थिक प्रभावों को बताया जाएगा। व्यापार प्रतिनिधियों ने बातचीत की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
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