दबाव में ट्रंप ने इजरायल से युद्धविराम करवाया: हसन
बेरूत (लेबनान)। लेबनान की संसद के सदस्य हुसैन हाज हसन का दावा है कि इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम ईरान द्वारा अमेरिका पर डाले गए बाहरी दबाव का परिणाम था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्लामी गणराज्य के प्रभाव के आगे झुक गए। इसी से इजरायली नेतृत्व को समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ईरानी मीडिया का हवाला
ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिजबुल्लाह से जुड़े 'लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस' के सदस्य हसन ने लेबनानी संसद में बोलते हुए यह टिप्पणी की।
ईरान के दबाव का दावा
प्रेस टीवी के मुताबिक, हसन ने कहा, 'ईरान के स्पष्ट दबाव के कारण युद्धविराम लागू किया गया था। ट्रंप ने ईरान के दबाव के आगे झुककर नेतन्याहू को लेबनान में युद्धविराम के लिए सहमत होने पर मजबूर किया।'
उल्लंघन पर चेतावनी
उन्होंने युद्धविराम के उल्लंघन के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि दुश्मन के 'धोखेबाज' रवैये को देखते हुए देश 'सतर्क' रहेगा।
सतर्क रहने की अपील
उन्होंने कहा, 'दुश्मन विश्वासघाती है इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने मौजूदा युद्धविराम का कई बार उल्लंघन किया है।'
हमास की भी प्रतिक्रिया
इसी बीच, हमास के प्रवक्ता हाज़ेम कासिम ने भी युद्धविराम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह इजरायली सैन्य सीमाओं को दर्शाता है।
इजरायल की क्षमता पर सवाल
ईरान के सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार, कासिम ने कहा, 'लेबनान में हुए युद्धविराम ने इजरायली कब्जे वाली सरकार की अक्षमता को उजागर कर दिया। लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध ने इजरायल पर युद्धविराम लागू करके एक बार फिर इस कब्जे वाली सरकार की अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थता को प्रदर्शित किया है।'
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