अमेरिकी संसद में ट्रंप के ईरान सैन्य अभियान पर लगाम की कोशिश, 220-204 से प्रस्ताव पास
वाशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के अधिकार को सीमित करने के लिए तीसरी बार मतदान किया है। सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर एक प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें प्रशासन को अमेरिकी सेना को शत्रुता से वापस बुलाने का निर्देश दिया गया है।
220-204 वोट से प्रस्ताव हुआ पास
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को 220-204 वोटों से पास हुए इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है कि वे "ईरान के साथ लड़ाई से अमेरिकी सेना को हटा लें", सिवाय उन सेनाओं के जो खास रक्षात्मक स्थितियों में शामिल हैं। जून और जुलाई में हाउस की पिछली दो कोशिशों की तुलना में इस बार के वोट को अधिक रिपब्लिकन समर्थन मिला।
सात रिपब्लिकन सांसदों ने दिया साथ
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, सात रिपब्लिकन ने इसके पक्ष में वोट किया, जिनमें तीन ऐसे सांसद भी शामिल थे जिन्होंने पहले के प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया था—ये हैं आयोवा की रिप्रेजेंटेटिव मैरिएनेट मिलर-मीक्स व ज़ैक नन, और साउथ कैरोलिना की नैन्सी मेस। इनके साथ केंटकी के थॉमस मैसी, मिशिगन के टॉम बैरेट, ओहियो के वॉरेन डेविडसन और पेन्सिलवेनिया के ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक भी शामिल हुए, जिन्होंने पहले ट्रंप की युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिशों का समर्थन किया था।
नन बोले- बिना समयसीमा वाली लड़ाई नहीं
वोटिंग के बाद नन ने अपने रुख का बचाव करते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मैं किसी और ऐसी लड़ाई का समर्थन नहीं करूंगा जिसकी कोई समय-सीमा तय न हो। हम अमेरिकियों की रक्षा कर सकते हैं, ईरान पर दबाव डाल सकते हैं और शांति की दिशा में काम कर सकते हैं, साथ ही यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि कांग्रेस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करे।" हाउस का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सांसद नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले प्रचार के लिए वॉशिंगटन छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यह नया प्रस्ताव ईरान के साथ टकराव शुरू होने के बाद से ट्रंप के मिलिट्री अधिकार को सीमित करने की हाउस की तीसरी कोशिश है।
सीनेट की मंजूरी अब भी बनी बड़ी चुनौती
सीनेट में इस उपाय के सफल होने की संभावना अभी भी अनिश्चित है। CNN के अनुसार, सीनेट में युद्ध-शक्ति से जुड़ा एक पिछला प्रस्ताव तब पास हुआ था जब ट्रंप के दबाव के बाद रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपना रुख बदल लिया था। इसलिए, हाउस के इस नए प्रस्ताव को राष्ट्रपति तक पहुंचने से पहले सीनेट से भी मंजूरी लेनी होगी। यह वोट ऐसे समय में हुआ है जब इस टकराव की वित्तीय लागत एक अहम मुद्दा बन गई है। कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) का अनुमान है कि 1 अगस्त तक इस युद्ध पर US रक्षा विभाग का लगभग 38 बिलियन डॉलर खर्च हुआ है और लड़ाई की तीव्रता के आधार पर मासिक खर्च 2 बिलियन से 3 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।
युद्ध शक्तियों पर कांग्रेस में बढ़ी बहस
CBO ने इस टकराव को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और महंगाई के बढ़ते दबाव से भी जोड़ा है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की शिपिंग में रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इस तरह, कांग्रेस में हुए हालिया वोट ने प्रशासन की ईरान नीति और युद्ध से जुड़े अधिकारों के संवैधानिक बंटवारे को अमेरिकी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है, क्योंकि कानून बनाने वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने और राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे को लेकर बंटे हुए हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: अमेरिकी युद्ध सचिव पीटर हेगसेथ पर रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने पेश किए महाभियोग के 8 बड़े आरोप