अमेरिका में नागरिकता रद्द करने का बड़ा अभियान, भारतीय मूल के व्यक्ति समेत 40 लोगों पर कार्रवाई
वॉशिंगटन (अमेरिका)। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने सोमवार को एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम के तहत देश के इतिहास के सबसे बड़े डीनैचुरलाइज़ेशन (नागरिकता रद्द करने) अभियान की शुरुआत की घोषणा की है। यह कार्रवाई धोखाधड़ी, पहचान छिपाने और गंभीर अपराधों के मामलों में की जा रही है, जिसके दायरे में भारतीय मूल के एक व्यक्ति समेत कुल 40 लोग आए हैं।
इतिहास का सबसे बड़ा नागरिकता अभियान
अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार को देश के समकालीन इतिहास के सबसे बड़े नागरिकता रद्द करने के अभियान का आगाज किया है। इस कड़े प्रशासनिक कदम के तहत 40 ऐसे लोगों की अमेरिकी नागरिकता को कानूनी रूप से निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिन्होंने धोखाधड़ी या गलत बयानी के जरिए यह दर्जा हासिल किया था। इस सूची में भारतीय मूल का एक व्यक्ति भी शामिल है। प्रभावित लोग इस समय देश की विभिन्न संघीय अदालतों (Federal Courts) में नागरिकता समाप्ति की कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। इन पर विदेशी सरकार के एजेंट के रूप में अवैध रूप से काम करने, गैर-इरादतन हत्या और विशेष रूप से सक्षम व्यक्ति के खिलाफ गंभीर यौन अपराधों जैसे गंभीर आरोप हैं।
“आज की घोषणा आधुनिक इतिहास में नागरिकता समाप्त करने का सबसे बड़ा प्रयास है।” — टॉड ब्लैंच, अटॉर्नी जनरल
इमीग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई प्राकृतिक रूप से बना अमेरिकी नागरिक (Naturalised Citizen) अपनी स्थिति को अवैध तरीकों से, महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाकर या भ्रामक जानकारी देकर हासिल करता है, तो उसकी नागरिकता और नागरिकता प्रमाण पत्र को औपचारिक रूप से रद्द किया जा सकता है।
भारतीय मूल के बलविंदर सिंह पर गंभीर आरोप
इस कानूनी कार्रवाई के मुख्य निशाने पर कैलिफोर्निया के निवासी बलविंदर सिंह हैं, जिनका मामला राज्य की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दर्ज किया गया है। न्याय विभाग के मुताबिक, सिंह ने साल 1992 में अपनी मूल पहचान से आव्रजन आवेदन दिया था, और बाद में 2003 में एक अन्य पहचान का उपयोग करके स्थायी निवासी (Permanent Resident) का दर्जा हासिल किया।
विभाग ने स्पष्ट किया कि फिंगरप्रिंट्स से इस बात की पुष्टि हुई है कि दोनों आवेदन सिंह द्वारा ही दाखिल किए गए थे। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने अपनी दूसरी पहचान के आधार पर अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर ली। दायर शिकायत में उनके द्वारा किए गए विभिन्न भ्रामक कृत्यों और गैर-कानूनी गतिविधियों के आधार पर सात अलग-अलग आरोप तय किए गए हैं, जो उनके आपराधिक और अनैतिक आचरण को दर्शाते हैं।
“इनमें से प्रत्येक व्यक्ति ने झूठ बोलकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की है। यह प्रशासन विभाग के इतिहास में सबसे बड़े नागरिकता निरस्तीकरण अभियान को आगे बढ़ाएगा ताकि अमेरिकी नागरिकता की गरिमा और विश्वसनीयता को बहाल किया जा सके।” — ब्रेट ए. शुमेट, असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल (सिविल डिवीजन)
चीनी मूल के पूर्व नौसैनिक की सजा का मामला
इस व्यापक अभियान के तहत प्रशासन चीन में जन्मे अमेरिका के पूर्व नौसैनिक जिनचाओ वेई की नागरिकता भी रद्द करने में जुटा है, जिन्हें पहले ही जासूसी से जुड़े मामलों में सजा मिल चुकी है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, वेई ने साल 2021 में नौसेना जॉइन की थी और फरवरी 2022 तक वह बीजिंग को संवेदनशील सैन्य जानकारियां बेचने की साजिश में शामिल हो गया था। अमेरिकी सशस्त्र बलों में उत्कृष्ट सेवा पूरी करने वाले कर्मियों के लिए बने त्वरित प्रावधानों के तहत उसने मई 2022 में अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी।
जासूसी की साजिश रचने, जासूसी करने और रक्षा उपकरणों से जुड़े तकनीकी डेटा के अवैध निर्यात के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद, अगस्त 2025 में अदालत ने वेई को 200 महीने की कैद की सजा सुनाई थी और उन्हें नौसेना से बर्खास्त कर दिया था।
कई अन्य देशों के नागरिक भी जांच के दायरे में
अमेरिकी न्याय विभाग ने इस बात की पुष्टि की है कि धोखाधड़ी, सक्रिय रूप से तथ्य छिपाने और झूठे दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता पाने वाले कुल 40 लोगों के खिलाफ चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत पाकिस्तान, मैक्सिको, कंबोडिया, नेपाल और अफगानिस्तान के नागरिकों के खिलाफ भी समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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