फ्रांस में महंगाई और प्रदर्शनों के बीच हिंसक उथल-प

फ्रांस में भड़की हिंसा पर ट्रंप और जेडी वेंस का तंज, बोले- 'चलो फ्रांस की क्रांति में शामिल होते हैं'

US President Donald Trump (File Photo)

वाशिंगटन (अमेरिका)। फ्रांस में बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान सामने आए हैं। ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर तंज कसते हुए इसे 'क्रांतियों का केंद्र' करार दिया है, वहीं वेंस ने इस संकट के लिए पश्चिमी देशों की आव्रजन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

फ्रांस में उग्र हुए प्रदर्शन और हिंसा

सप्ताहांत में फ्रांस के कई शहरों में महंगाई, सरकारी बजट और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर की रैलियों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि सीजीटी (CGT) मजदूर संघ का दावा है कि यह संख्या 8 लाख के करीब थी। 

राजधानी पेरिस समेत कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी और एप्पल, लुई वुइटन तथा हर्मीस जैसे प्रीमियम ब्रांड्स के स्टोर्स में लूटपाट की। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

ट्रंप और जेडी वेंस की तीखी प्रतिक्रियाएं

संकट पर कटाक्ष करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "चलो फ्रांस चलते हैं? यह एक बहुत अच्छी जगह है। वहां कोई दंगा नहीं, कोई क्रांति नहीं होती। वैसे, फ्रांस तो क्रांतियों के लिए एकदम बेहतरीन जगह लगता है!" वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस हिंसा के लिए पश्चिमी देशों के उदारवादी रवैये को कोसा। 

वेंस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर 'तीसरी दुनिया' के लोगों को फ्रांस और अन्य देशों में बसाया, लेकिन अनुकूलता और सांस्कृतिक सद्भाव जैसे बुनियादी सवालों को नजरअंदाज कर दिया।" उन्होंने अमेरिकी डेमोक्रेट्स पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अमेरिका का भी यही हश्र करना चाहते हैं।

मैक्रों सरकार पर बढ़ता राजनीतिक दबाव

यह नागरिक अशांति ऐसे समय में भड़की है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यकाल के बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में लगभग छह महीने का वक्त बचा है। इस हिंसा और व्यापक पैमाने पर हुई तबाही ने मैक्रों प्रशासन पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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