अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने कहा है कि वॉशिं

होर्मुज़ स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के करीब पहुंचा अमेरिका

जेडी वेन्स

मैरीलैंड : अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने कहा है कि वॉशिंगटन होर्मुज़ स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के बेहद करीब है। जेडी वेन्स का बयान ऐसे समय में आया है जब इलाके में तनाव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। 

होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से खुलने की बढ़ी संभावना

जेडी वेन्स ने मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रूज़ में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अमेरिका की हालिया कार्रवाइयों से होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से खुलने की संभावना है। साथ ही ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताएं कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ''ट्रंप प्रशासन ने ईरानियों को उनके परमाणु कार्यक्रम के बारे में बात करने के लिए राज़ी कर लिया है, और शायद इस बात के लिए भी प्रतिबद्ध कर लिया है कि वे ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं रखेंगे।''

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी का आर्थिक और सैन्य कदमों पर जोर

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन द्वारा ईरान पर लागू किए गए "सैन्य कार्रवाइयों और आर्थिक दबाव" की सराहना की। बेसेंट ने कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए मजबूर हुआ है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि किसी भी पिछले प्रशासन ने हासिल नहीं की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी डील राष्ट्रपति ट्रंप की मांगों के अनुरूप होगी, जिसमें ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम सौंपना, परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा, और होर्मुज़ स्ट्रेट की आवाजाही को मुक्त करना शामिल है।

ट्रंप की अंतिम मंजूरी और ईरान की स्वीकृति का इंतजार

खबरों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के वार्ताकार एक अस्थायी 60-दिन के समझौता ज्ञापन पर पहुंच चुके हैं, जिसका उद्देश्य संघर्ष-विराम को स्थिर करना और औपचारिक बातचीत के लिए रास्ता खोलना है। यह समझौता अब राष्ट्रपति ट्रंप की अंतिम मंजूरी और ईरान की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है।

ट्रंप की परमाणु संबंधी मांगों की पूर्ति आवश्यक

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इस MoU को एक पुल के रूप में डिजाइन किया गया है, ताकि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आ सकें और इलाके के संकट को हल किया जा सके। हालांकि, अंतिम बाधा अब भी शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी है। यदि यह डील पक्की हो जाती है, तो यह हाल के महीनों में क्षेत्र में हुई सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी। लेकिन, इसके लिए अभी भी लंबी बातचीत और ट्रंप की परमाणु संबंधी मांगों की पूर्ति आवश्यक है।

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