US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को फुटेज जा

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा: ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में अमेरिका ने मिसाइल और रडार ठिकानों पर किया बड़ा हमला

US Strikes Iranian Missile Sites After Drone Attack on Cargo Ship

फ्लोरिडा (अमेरिका)। US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को फुटेज जारी किया है जिनमें ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज तथा तटीय रडार साइटों पर US सेना के हमले दिखाए गए। ये हमले तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर किए गए हमले के जवाब में किए गए थे।

सिंगापुर के कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले का जवाब

CENTCOM के एक बयान के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 26 जून को हमले किए। ये हमले एक दिन पहले सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज M/V एवर लवली पर हुए हमले के जवाब में किए गए थे। ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते समय ईरानी सेना द्वारा छोड़े गए एक 'वन-वे अटैक ड्रोन' ने इस जहाज को निशाना बनाया था। सेंटकॉम ने कहा, "ईरान द्वारा 25 जून को एम/वी एवर लवली पर एकतरफा हमले वाले ड्रोन से हमला करने के बाद अमेरिकी विमानों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों और तटीय रडार साइटों पर हमला किया।"

ईरान पर सीज़फ़ायर समझौते के उल्लंघन का आरोप

अमेरिकी सेना ने कमर्शियल जहाज़ पर हुए हमले को बेवजह की आक्रामकता बताया और कहा कि इसने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीज़फ़ायर समझौते का उल्लंघन किया है। साथ ही दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक से गुज़रने की आज़ादी को भी कमज़ोर किया है। बयान में कहा गया कि, "ईरानी सेनाओं द्वारा कमर्शियल जहाजों के खिलाफ़ बिना वजह की आक्रामकता ने साफ़ तौर पर युद्धविराम का उल्लंघन किया। इसके अलावा, ईरान के अक्रामक व्यवहार ने नेविगेशन की आज़ादी को कमज़ोर किया।" CENTCOM ने कहा कि उसकी सेनाएँ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाज़ों को सुरक्षा और सहयोग देना जारी रखे हुए हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते का पालन सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना तैनात और सतर्क है।

ईरानी सेना ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर की जवाबी कार्रवाई

अमेरिका के हमलों के बाद, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने वाशिंगटन की इस कार्रवाई को उस 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत किए गए वादों का उल्लंघन बताया, जिसका मकसद क्षेत्र में दुश्मनी को खत्म करना था।

अमेरिका पर MoU और नियमों को तोड़ने का आरोप

IRGC के पब्लिक रिलेशंस विभाग के एक बयान और ईरान के सरकारी मीडिया 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका के हवाई हमलों के जवाब में की गई थी। IRIB के अनुसार, बयान में कहा गया है कि IRGC नेवी ने अमेरिका की आक्रामकता और वादा तोड़ने की कार्रवाई का जवाब दिया है। IRGC ने अमेरिका पर अपनी ज़िम्मेदारियों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिकी हमले होर्मुज़ जलडमरूमध्य से किसी जहाज़ के अवैध रूप से गुज़रने को रोकने के बहाने किए गए थे।

IRGC की चेतावनी- दोबारा उल्लंघन हुआ तो मिलेगा कड़ा जवाब

बयान में कहा गया कि, "इस आक्रामकता के जवाब में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने क्षेत्र में अमेरिकी आतंकवादी सेना के ठिकानों पर हमला किया।" ईरान के बयान में आगे यह भी दावा किया गया कि MoU के आर्टिकल 5 के तहत ईरान के साथ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ट्रैफ़िक को नियंत्रित करने की व्यवस्था मौजूद थी और आरोप लगाया गया कि अमेरिका ने इन व्यवस्थाओं को कमज़ोर करने की कोशिश की। IRIB ने IRGC के हवाले से चेतावनी दी कि अगर उल्लंघन दोबारा हुआ, तो इसका जवाब और भी कड़ा होगा। बयान में कहा गया, "अगर उल्लंघन दोहराया गया, तो हमारा जवाब इससे कहीं ज़्यादा सख़्त होगा।" (Source: ANI)

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 95 विकासखंडों में 3 दिवसीय स्वास्थ्य शिविर, अब डाकिया घर पहुंचाएगा मुफ्त दवाएं