अमेरिकी टैरिफ व EU पाबंदियों से निर्यातक संकट में, वित्त मंत्री से विशेष सहूलियतों की मांग
America : अमेरिका और यूरोपीय देशों में निर्यात के मोर्चे पर आ रही चुनौतियों को देखते हुए भारतीय उद्योग जगत ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से संसद में पेश होने वाले आम बजट में रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात बढ़ाने के उपायों पर विशेष ध्यान दिये जाने की मांग की है। साथ ही उद्योग ने उत्पादन लागत कम करने और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की केन्द्रीय मंत्री से मांग की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन आगामी एक फरवरी को संसद में पेश करेंगी बजट।
फिक्की (FICCI) द्वारा देश के प्रमुख मीडिया हाउस के सहयोग से विभिन्न कार्पोरेट और कंपनियों के बीच कराये गये सर्वे में यह मांग सामने आई है जिसे गुरुवार को जारी किया गया। सर्वे में निर्यातकों ने कहा कि सरकार को उत्त्पादन लागत घटाने और विदेश में माल भेजने में सहूलियतें बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। सर्वे में 54% प्रतिभागियों ने बजट में निर्यात को मजबूत समर्थन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहतर सहूलियतें दिये जाने की मांग की ताकि उत्पादन लागत कम हो सके। सर्वे में रक्षा विनिर्माण पर विशेष जोर दिये जाने, ड्रोन पीएलआई परिव्यय बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये करने और कर नियमों का सरलीकरण किये जाने पर विशेष जोर दिया गया है।
FICCI सर्वे में कंपनियों ने कहा है कि 'वैश्विक तनाव, टैरिफ पर अनिश्चितता और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को देखते हुए बजट में निर्यात को सपोर्ट दिया जाना समय की मांग है। निर्यातकों ने कहा कि कस्टम्स प्रोसेस दुरुस्त करने से लेकर लॉजिस्टिक्स संबंधी दिक्कतें दूर की जाएं।
मीडिया हाउस ईकोनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार निर्यातकों के संगठन FIEO के प्रेसिडेंट एस सी रल्हन ने कहा, 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या तुरंत दूर करने की जरूरत है। इसमें कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर ड्यूटी तैयार माल पर ड्यूटी से ज्यादा है। निर्यातकों के लिए कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई जानी चाहिए क्योंकि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से लागत बढ़ती है और विदेश में दूसरे देशों के मुकाबले कीमत कम रखने में दिक्कत होती है।' रल्हन ने रिसर्च एंड डिवेलपमेंट के लिए निर्यातकों को टैक्स छूट और विदेश में मार्केटिंग में खर्च होने वाली राशि पर 200% टैक्स डिडक्शन की मांग भी रखी।
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गये भारी टैरिफ के बाद अब यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने भी तरजीही देशों (फेवर्ड नेशन) की श्रेणी के रूप में भारत को निर्यात में मिलने वाले छूट कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इन वजहों से भारत के निर्यातकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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