एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध प्र

कमजोर कानून लागू होने से महिलाओं को नहीं मिल रहा न्याय, घरेलू हिंसा के मामलों पर उठे सवाल

Justice gap in domestic abuse cases

कराची:  एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध प्रांत में घरेलू हिंसा (रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम, 2013 लागू होने के एक दशक से अधिक समय बाद भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा बेरोकटोक जारी है। कमजोर प्रवर्तन और अपर्याप्त जांच के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

कानून बना, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानून महिलाओं को शारीरिक, यौन, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक शोषण से बचाने के उद्देश्य से लाया गया था। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर पुलिस व्यवस्था और संस्थागत समर्थन की कमी के कारण इसका प्रभाव सीमित रह गया है।

डर और दबाव में शिकायत दर्ज नहीं करा रहीं महिलाएं

कानून लागू होने के बाद घरेलू हिंसा के मामले दर्ज होने लगे, लेकिन कई महिलाएं पारिवारिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज कराने से बचती हैं। वहीं, कई पीड़ित पुलिस की अनिच्छा और त्रुटिपूर्ण जांच के चलते अपने मामले वापस लेने को मजबूर हो जाती हैं।

न्याय पाने में कई बाधाएं

लीगल एड सोसाइटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू हिंसा पूरे सिंध में व्यापक है और पीड़ितों को न्याय पाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संगठन के अनुसार, कमजोर प्रवर्तन तंत्र और सिंध महिला स्थिति आयोग जैसे संस्थानों की सीमित वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता के कारण कानूनी सुरक्षा उपाय प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं।

महिला पुलिस अधिकारियों की कमी बनी चुनौती

सिंध महिला वकीलों के गठबंधन की अध्यक्ष अधिवक्ता शाज़िया निज़ामानी ने कहा कि कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से इसलिए भी हिचकिचाती हैं क्योंकि मामलों की जांच प्रायः पुरुष पुलिस अधिकारी करते हैं। उन्होंने महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और जांच के लिए अधिक महिला अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की।

204 मामले दर्ज, लेकिन एक भी दोषसिद्धि नहीं

सस्टेनेबल सोशल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (एसएसडीओ) के अनुसार, वर्ष 2025 की पहली छमाही में सिंध में घरेलू हिंसा के 204 मामले दर्ज हुए। इनमें से 98 मामले अदालत पहुंचे और 70 मामलों में सुनवाई हुई, लेकिन किसी भी मामले में दोषसिद्धि नहीं हो सकी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुलिस ने 14 मामले वापस ले लिए, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति अधिक गंभीर

स्थानीय अधिकार कार्यकर्ता अकरम खस्खेली ने कहा कि ग्रामीण सिंध में गरीबी, कम साक्षरता और गहरी सामाजिक सोच के कारण घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाएं खुलकर सामने नहीं आ पातीं और न्याय से वंचित रह जाती हैं।

(एएनआई)

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