नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए WHO ने जारी किए 1.5 लाख डॉलर, 10 हजार परिवार प्रभावित
नई दिल्ली (भारत)। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। राष्ट्रीय अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ में 730 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। इस गंभीर मानवीय और स्वास्थ्य संकट के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रभावित समुदायों की तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपातकालीन कोष (SEARHEF) से 1,50,000 अमेरिकी डॉलर की सहायता जारी की है। WHO इससे पहले जरूरी मेडिकल सप्लाई और मल्टीपर्पस टेंट भी प्रभावित इलाकों में भेज चुका है।
WHO ने इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई और टेंट भेजे
WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी डॉ. नीलेश बुद्ध ने कहा, "यह इमरजेंसी फंड तत्काल राहत कार्यों में मदद करेगा। WHO राहत और रिकवरी के प्रयासों के जरिए नेपाल की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।" इससे पहले, 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के कुछ ही घंटों के भीतर, WHO ने जरूरी इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई जुटाई और भेजीं। इनमें एक 'इंटरएजेंसी इमरजेंसी हेल्थ किट' भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों की 3 महीने तक की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा कर सकती है, साथ ही मल्टीपर्पस टेंट भी भेजे गए।
नेपाल बाढ़ में 730 से ज्यादा मौतें, हजारों लोग लापता
तत्काल जरूरतों को देखते हुए, WHO ने प्रभावित इलाकों के लिए सर्जिकल मास्क और दस्ताने, हैंड सैनिटाइजर और अन्य मेडिकल सप्लाई भी जुटाईं। राष्ट्रीय अधिकारियों की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ में 730 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लगभग 2500 लोग लापता हैं, 200 से ज्यादा घायल हैं और 74 लोगों का इलाज चल रहा है।
छह जिलों के 10 हजार परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत
बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित बागमती और गंडकी प्रांतों के छह जिलों में अनुमानित 10,000 परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत है। बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान, लोगों का विस्थापन और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित जरूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें आ रही हैं।
स्वास्थ्य केंद्र तबाह, कई अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल
सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले में चार स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं, और धाडिंग में दो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। धाडिंग और त्रिशूली के दो अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है क्योंकि सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिन इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है, वहां विस्थापित आबादी तक पहुंचना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
WHO ने स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए सरकार संग मिलाया हाथ
WHO स्वास्थ्य संबंधी राहत कार्यों में तालमेल बिठाने, बीमारी की निगरानी को मजबूत करने, जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने और उभरते स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करके उनसे निपटने के लिए सरकार और सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इनमें डूबने की घटनाएँ, चोटें, दस्त और सांस से जुड़ी बीमारियाँ, पानी और खाने से होने वाली बीमारियाँ और वेक्टर-जनित (कीड़ों-मकोड़ों से फैलने वाली) बीमारियाँ शामिल हैं।
विस्थापन और अपनों को खोने से मानसिक सेहत पर गहरा असर
अपनों, घरों और रोजगार को खोने के साथ-साथ विस्थापन और अनिश्चितता का असर प्रभावित समुदायों की मानसिक सेहत और सामाजिक-मनोवैज्ञानिक भलाई पर भी गहरा पड़ सकता है। (Source: ANI)
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