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श्रम सुधारों से देश के आईटी और BPM कारोबार पर..

श्रम सुधारों से देश के आईटी और BPM कारोबार पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ

labor Reforms : केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हाल में लागू किये गये श्रम सुधारों से देश का आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट..

श्रम सुधारों से देश के आईटी और bpm कारोबार पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ

श्रम सुधारों से देश के आईटी और BPM कारोबार पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ |

labor Reforms : केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हाल में लागू किये गये श्रम सुधारों से देश का आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नए लेबर कोड्स का लागू होने से देश की बड़ी आईटी कंपनियों पर करीब 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। अब आईटी कंपनियों को उम्मीद है कि अगले हफ्ते संसद में पेश होने वाले केन्द्र सरकार के यूनियन बजट में नए लेबर कोड्स को लेकर तस्वीर साफ कर सकती है।

केन्द्र सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत 40 करोड़ कामगारों को सामाजिक सुरक्षा, पीएफ और न्यूनतम वेतन प्रदान करने के उद्देश्य से चार नए श्रम कोड (Labour Codes) लागू किये हैं। 21 नवंबर 2025 से लागू यह श्रम कोड 29 पुराने कानूनों को मिलाकर बनाया गया है। सरकार का दावा है कि ये सुधार कामगारों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा के उद्देश्य से लाए गए हैं। लेकिन उद्योग का मानना लेकिन इन सुधारों से आईटी और BPM इंडस्ट्री के लिए अनुपालन (compliance) बोझ और परिचालन लागत बढ़ने की संभावना है, जिससे आईटी इंडस्ट्री मुश्किल में आ सकती हैं। यह कानून 24x7 काम करने वाली आईटी इंडस्ट्री के लिए काम के घंटों और ओवरटाइम के नियमों में भी बदलाव ला सकता है, जिससे नियोक्ताओं को अपनी नीतियों को दोबारा नये सिरे से परिभाषित करना होगा।

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन 1 फरवरी को संसद में यूनियन बजट  2026 पेश करेंगी। श्रम कोड से उपजी शंकाओं के बीच आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट इंडस्ट्री को  यूनियन बजट  2026 से कई उम्मीदें हैं। इनमें नए लेबर कोड्स पर स्पष्टीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ाने वाले उपाय और टैलैंट पाइपलाइन को स्ट्रॉन्ग बनाने पर फोकस शामिल हैं। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे ग्लोबल मार्केट में इंडियन आईटी कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बनी रहेगी।

आईटी कंपनियों को उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट में नए लेबर कोड्स को लेकर तस्वीर साफ कर सकती है। सरकार ने पिछले साल के आखिर में चार नए लेबर कोड़्स लागू करने का ऐलान किया था। दिसंबर तिमाही के आईटी कंपनियों के नतीजों में नए लेबर कोड्स के संभावित असर के बारे में बताया गया था। नए लेबर कोड्स का लागू होने से देश की बड़ी आईटी कंपनियों पर अतिरिक्त करीब 5,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।

देश के बड़े आर्थिक मीडिया हाउस "मनीकंट्रोल" की रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख आईटी कंपनी "टेक महिंद्रा" के सीईओ और एमडी मोहित जोशी ने बताया कि नए लेबर कोड्स के प्रावधानों का सीधा असर आईटी कंपनियों के प्रॉफिट पर पड़ेगा। इसलिए इन्हें लेकर तस्वीर साफ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। आईटी इंडस्ट्री को सरकार का सपोर्ट मिलता रहा है।

आईटी इंडस्ट्री यूनियन बजट में सरकार से एआई आधारित बदलाव को बढ़ावा देने वाली पॉलिसी चाहती है। इंडस्ट्री का मानना है कि एआई, ऑटोमेशन और जेनरेटिव एआई अब उत्पादकता और सर्विस की क्वालिटी बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हो चुके हैं। यूनियन बजट में इसके लिए कदम उठाने का बड़ा मौका है। "हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजी" के मैनेजिंग डायरेक्टर वेंकटरमण नारायणनन ने कहा कि आईटी/बीपीएम इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार ग्लोबल डिजिटल और सर्विसेज के हब के रूप में इंडिया की लीडरशिप बनाए रखने वाले उपायों का ऐलान करेगी।

आईटी/बीपीएम की ग्रोथ के लिए टैलैंट तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल सर्विसेज की डिमांड अच्छी है, लेकिन वर्कफोर्स के मामले में दो तरह की चुनौतियां दिख रही हैं। पहला, एंट्री लेवल पर तैयारी से जुड़ी चुनौती है तो दूसरा मिड-करियर एंप्लॉयीज का इस्तेमाल हायर वैल्यू और टेक्नोलॉजी आधारित रोल के लिए करने से जुड़ी हैं। इंडस्ट्री का फोकस नई हायरिंग को जल्द प्रोडक्टिव बनाने पर है।

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