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जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग की जीवन यात्रा

जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग की जीवन यात्रा, साम्राज्यवाद की प्रशंसा में कविताएं लिखीं

MP News : जबलपुर। रुडयार्ड किपलिंग बिटिश साम्राज्य के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने साम्राज्यवाद की प्रशंसा में कई कविताएं लिखीं।

जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग की जीवन यात्रा साम्राज्यवाद की प्रशंसा में कविताएं लिखीं

जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग की जीवन यात्रा |

Rudyard Kipling : रुडयार्ड किपलिंग बिटिश साम्राज्य के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने साम्राज्यवाद की प्रशंसा में कई कविताएं लिखीं। किपलिंग का पूरा नाम जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग था। उनके पिता का नाम जॉन लॉकबुड और माता का नाम एलिस था। उनके माता-पिता की मुलाकात 1863 में स्टैफोर्डशायर स्थित रुडयार्ड झील के पास हुई थी। 

झील की सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने पहले बच्चे का नाम रुडयार्ड रखा था। बच्चे के नाम से ही खूबसूरत झील की याद जहन में दौड़ पड़ती है। तब झील लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रुप में प्रसिद्ध था। समय गुजरते यह नाम उनसे इतनी मजबूती से जुड़ गया कि दुनिया उन्हें रुडयार्ड किलपिंग के नाम से जानने लगी। 

रुडयार्ड किपलिंग बॉम्बे के मालाबार हिल में पले- बढे। उनके पिता जॉन लॉकवुड एक मूर्तिकार थे और साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल थे। परिवार ने साहित्य औऱ कला को तबज्जो दी। इसका असर किपलिंग पर भी पड़ा। वे 5 साल की छोटी उम्र से ही कहानियां सुनाने लगे। उन्हें तब इग्लैंड भेजा गया। वहां वे एक बोर्डिंग हाउस में रहे औऱ अध्ययन-अध्यापन किया। इस स्थान को उन्होंने हाउस आफ डेमोलेशन कहा। उसके बाद 16 साल की उम्र में भारत लौटे औऱ पत्रकारिता शुरू की। जब युवा अवस्था की दहलीज पर थे तब उनकी मुलाकात मार्क ट्वैन से हुई। यही मुताकात थी कि जंगल बुक की नींव पड़ी। 

स्काउटिंग के संस्थापक राबर्ट बैजेन पालेल ने भी जंगल बुक पढ़ी। इससे वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बच्चों के लिए वुल्फ कब्स का कार्यक्रम शुरू किया। किपलिंग के किताब के पात्रों बल्लु, बघीरा को नेतृत्व के लिए तैयार किया और उसे सामूहिक काम करने के लिए भी प्रयोग किया। इसी से कब स्काउट में ग्रैड हाउल औऱ जेंगल के नियम हैं। 

किपलिंग को जंगल बुक का आइडिया पंचतंत्र की कहानी और जातक कथा से मिला। इस कहानी में जानवर आदमी की भाषा बोलता है और नौतिकता के बारे में बताता है। किप्लिंग बुक का जंगल मध्य प्रदेश के सिवनी के जंगल पर से प्रेरित है। ऱॉबर्ट स्टर्नडेल की पुस्तक सिवनी- कैप लाइफ ऑन द सतपुड़ा रेंज से जेंगल बुक लिखने की प्रेरणा मिली। यह किताब 1887 में प्रकाशित हुई। किपलिंग ने भारत में रहते समय एक साल में छह छोटी कहानियों की किताब प्रकाशित की। जब वे 41 साल के थे, तब उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था। यह वर्ष 1907  था। उनकी पहली कविता संग्रह डिपार्टमेंटल डिटीज प्रकाशित हुई। 

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