केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष को तरजीह देने से प्रदेश भाजपा के असंतुष्ट नेता-कार्यकर्ता उत्साहित हुए हैं। वे सक्रिय दिखने लगे है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश के असंतुष्ट भाजपा नेताओं को किया संतुष्ट
पार्टी में गुटबाजी खत्म होने की उम्मीद
कोलकाता।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष को तरजीह देने से प्रदेश भाजपा के असंतुष्ट नेता-कार्यकर्ता उत्साहित हुए हैं। वे सक्रिय दिखने लगे है। भाजपा को विधानसभा चुनाव में इसका फायदा होगा।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश भाजपा की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रदेश के आला पदाधिकारियों ने लगातार कई कार्यक्रम करने का फैसला किया। उनमें एक “परिवर्तन संकल्प यात्रा” कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम तहत राज्य के सभी जिल स्तर से लेकर बूथ स्तर तक सभा और जुलूस निकालना है। इस कार्यक्रम को हर स्तर के नेताओं को एकजुट होकर कामयाब करना है, लेकिन कार्यक्रम के दौरान एकता नहीं देखी गई। असंतुष्ट नेता-कार्यकर्ता अलग-थलग दिखे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और उनका साथ देने वाले खेमे के नेता अलग से कार्यक्रम करते देखे जाते रहे। कहीं-कहीं तो संतुष्ट और असंतुष्ट खेमे की ओर से आयोजित कार्यक्रम एक दूसरे को दिखाने के लिए ही आयोजित किए गए।
भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा में विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी में नेताओं को बीच दूरी और कई प्रकार के होने का खुलासा ही कर दिया। उन्होंने अपने को तीसरे प्रकार का नेता बता कर यह संकेत भी कर दिया था कि वे उपेक्षित हैं। प्रदेश अध्यक्ष व सांसद शमिक भट्टाचार्य ने इस तरह की बात नहीं करने की मनाही भी की। शमिक भट्टाचार्य की मनाही और शुभेंदु अधिकारी की चुप्पी के बाबजूद उसी समय से पार्टी में यह चर्चा होने लगी कि किस नेता की किस तरह उपेक्षा हो रही है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कोलकाता आने का तीन दिन का कार्यक्रम बनाने के पहले उन्हें प्रदेश भाजपा में संतुष्ट-असंतुष्ट की समस्या का पता चल गया था। उन्होंने इस समस्या का समाधान करना तय कर लिया था। प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष का उनके कार्यक्रम में मौजूद होना तय नहीं था। अमित शाह ने उन्हें बुलवाया और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार के साथ बैठा कर बातचीत की। अमित शाह ने ऐसा कर प्रदेश भाजपा को अचरज में डाल “नेताओं के बीच आपसी एकजुटता” की दिशा में आगे बढ़ा दिया। नतीजतन असंतुष्ट नेता संतुष्ट और सक्रिय नजर आ रहे है।