जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की उस हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें...
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा - मानव भ्रूण को कोर्ट रूम में लाने से अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची
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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की उस हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें वह मिसकैरेज (गर्भपात) हुए मानव भ्रूण को सीधे कोर्ट रूम के अंदर ले आया था। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने इस कृत्य को पूरी तरह से अनुचित और गैर-कानूनी करार दिया है।
अदालत ने क्या कहा?
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़े तर्क दिए कि यह बायोमेडिकल वेस्ट नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रूण, जो कि इंसान का शरीर है, उसे 'बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016' के नियमों के तहत ही हैंडल और डिस्पोज (निस्तारण) किया जाना चाहिए
इंसानी लाश का अपमान करने जैसा अपराध
कोर्ट रूम जैसी सार्वजनिक जगह पर बिना अनुमति ऐसे अवशेषों को लाना न सिर्फ तय प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि पहली नज़र में यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत इंसानी लाश का अपमान करने जैसा अपराध है।
अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची
कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यवहार न्यायिक मर्यादा और गरिमा को गहरी ठेस पहुँचाता है। यह न केवल कोर्ट के डेकोरम के खिलाफ है, बल्कि न्यायिक कार्यवाही में रुकावट डालने की कोशिश भी है।
याचिकाकर्ता को चेतावनी
हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि भविष्य में वह ऐसी हरकत किसी भी कोर्ट, ज्यूडिशियल फोरम या पब्लिक अथॉरिटी के सामने दोबारा न दोहराए। इस तरह के कृत्यों को अदालत द्वारा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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