MP News : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के एक कोर्ट द्वार बिना कारण बताए संक्षिप्त फैसले देने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
MP News : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा - ऐसा आदेश पारित करना असंवैधानिक और निंदनीय |
MP News : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के एक कोर्ट द्वारा बिना कारण बताए संक्षिप्त फैसले देने पर कड़ी आपत्ति जताई है। जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की एकल पीठ ने कहा, ऐसा फैसला देना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि निंदनीय भी है। अपीलीय कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द करने के लिए कोई तर्क नहीं दिया। इसमें रिकार्ड में मौजूद साक्ष्यों का मूल्यांकन और विश्लेषण शामिल है। अपीलीय न्यायालय के न्यायिक अधिकारी से अपेक्षा नहीं की जाती है कि मामले पर विचार किये बिना औऱ साक्ष्यों पर विचार किये बिना इस प्रकार के संक्षिप्त, सारगर्भित और अस्पष्ट आदेश पारित करें।
दरअसल, भापाल की ट्रायल कोर्ट ने मारपीट के एक मामले में आरोपी बाबूलाल मालवीय को छह महीने की कठोर कारावास और 1 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाबूलाल ने अपीलीय कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। अपीलीय कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों पक्ष के तर्क सुने गए, ट्रायल कोर्ट से मिले मूल प्रकरण का अवलोकन किया गया। अपील स्वीकार योग्य पाए जाने पर स्वीकार की जाती है। अपीलार्थी को दोषमुक्त किया जता है। राज्य सरकार ने अपीलीय कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने बानी सिंह सहित कई अन्य प्रकरण में कहा कि कानून स्पष्ट रूप से अपेक्षा करता है कि अपीलीय कोर्ट अपील का निपटारा गुण व दोष के आधार पर करे। ट्रायल कोर्ट के फैसले में दिए गए तर्कों का अध्ययन करे और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के साथ तर्कों की भी जांच करे। ऐसा इसलिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निचली अदालत द्वारा दर्ज किए गए तर्क और निष्कर्ष रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के अनुरुप हो।
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