भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 5.5 करोड़ लोगों के लिए राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारें, बार-बार चक्कर लगाना और कम अनाज मिलने की शिकायतें जल्द खत्म हो सकती हैं...
भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 5.5 करोड़ लोगों के लिए राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारें, बार-बार चक्कर लगाना और कम अनाज मिलने की शिकायतें जल्द खत्म हो सकती हैं। लगभग 10 साल बाद राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था में तकनीक के जरिए उन खामियों को दूर किया जाएगा, जिनसे गरीबों का राशन चोरी या बर्बाद होता रहा है। इसका उद्देश्य राशन वितरण को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है।
इस बदलाव के बाद बुजुर्गों को फिंगरप्रिंट न मिलने की समस्या से राहत मिलेगी। वहीं मजदूरों को यह जानने के लिए काम छोड़कर दुकान के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे कि राशन आया या नहीं। जैसे ही राशन वाहन दुकान पर अनाज उतारेगा, लाभार्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS अलर्ट भेजा जाएगा। इसके बाद लोग दुकान पर चेहरा पहचान (Face Recognition) के जरिए अपना पूरा राशन ले सकेंगे।
फिंगरप्रिंट की परेशानी खत्म, अब चेहरा बनेगा पहचान
जब राज्य में 2015 में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया गया था, तब इसे बड़ा सुधार माना गया था। POS मशीन पर फिंगरप्रिंट स्कैन करके पहचान सत्यापित करने से धोखाधड़ी कम हुई, लेकिन इसकी सीमाएं भी सामने आईं। कई बुजुर्गों, किसानों और मेहनतकश मजदूरों के हाथों की रेखाएं व उंगलियों के निशान घिस जाते हैं, जिससे मशीन पहचान नहीं कर पाती। ऐसे में उन्हें राशन के लिए बार-बार भटकना पड़ता था। इस समस्या को खत्म करने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग अब फेस रिकग्निशन तकनीक अपना रहा है।
अब POS मशीन में कैमरा लगाया जाएगा, जो लाभार्थी के चेहरे को स्कैन कर आधार डाटाबेस से मिलान करके तुरंत पहचान सत्यापित करेगा। इससे प्रक्रिया तेज होगी और फिंगरप्रिंट मिसमैच से परेशान लोगों को राहत मिलेगी।
नई व्यवस्था ऐसे काम करेगी
यह बदलाव सिर्फ पहचान सत्यापन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गोदाम से लेकर लाभार्थी तक अनाज पहुंचने का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
गोदाम से दुकान तक GPS मॉनिटरिंग
राशन चोरी का सबसे बड़ा कारण ट्रांसपोर्ट में गड़बड़ी होती है। इसे रोकने के लिए भोपाल के पर्यावास भवन में एक आधुनिक स्टेट कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया गया है। जैसे ही कोई राशन वाहन सरकारी गोदाम से निकलेगा, उसकी GPS निगरानी शुरू हो जाएगी। कंट्रोल रूम में बड़ी स्क्रीन पर पूरे राज्य के राशन वाहनों की लाइव लोकेशन दिखेगी। यदि कोई वाहन निर्धारित रास्ते से हटेगा, तो तुरंत अधिकारियों और वाहन मालिक के मोबाइल पर अलर्ट चला जाएगा।
दुकान पर अनाज उतरते ही स्टॉक ऑटो अपडेट
जैसे ही वाहन दुकान पर पहुंचेगा और अनाज उतरेगा, उसी समय सिस्टम में एंट्री होकर दुकान का स्टॉक ऑनलाइन अपडेट हो जाएगा। इससे साफ पता चलेगा कि गोदाम से कितना अनाज निकला और दुकान तक कितना पहुंचा।
राशन आते ही हर परिवार को SMS मिलेगा
यह नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा होगा। अभी तक लोगों को यह जानने के लिए कई बार दुकान जाना पड़ता था कि राशन आया या नहीं। अब जैसे ही दुकान का स्टॉक ऑनलाइन अपडेट होगा, उसी दुकान से जुड़े सभी लाभार्थी परिवारों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ऑटोमेटेड SMS तुरंत भेज दिया जाएगा।
कम्प्यूटरीकृत तराजू से कम तौल की शिकायतें खत्म
राशन दुकानों पर लगे तौल उपकरण सीधे कंप्यूटर और POS मशीन से जुड़े होंगे। दुकानदार जैसे ही अनाज तौलेगा, मात्रा अपने आप कंप्यूटर में दर्ज होगी और उतनी मात्रा दुकान के कुल स्टॉक से घट जाएगी। इससे दुकानदार चाहकर भी कम राशन नहीं दे पाएगा।
राशन मिलने के तुरंत बाद SMS और पक्की रसीद
जैसे ही लाभार्थी राशन प्राप्त करेगा, तुरंत मोबाइल पर दूसरा SMS आएगा। इसमें साफ लिखा होगा कि कितनी मात्रा में गेहूं, चावल या अन्य अनाज दिया गया। इसके साथ POS मशीन से प्रिंटेड स्लिप/रसीद भी निकलेगी, जो लाभार्थी को दी जाएगी। इस दोहरी पुष्टि से धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी।
मध्यप्रदेश बनेगा देश का पहला राज्य
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आयुक्त कर्मवीर शर्मा के अनुसार केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले राशन वितरण को आधुनिक बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। राज्य पहले से टेंडर प्रक्रिया में था, इसलिए इन निर्देशों को योजना में शामिल कर लिया गया। राज्य ने POS मशीन के साथ-साथ फेस रिकग्निशन, कंप्यूटर संचालित तौल मशीन और बल्क SMS सिस्टम को एक साथ लागू करने का निर्णय लिया है। कमांड सेंटर पूरी तरह तैयार है।
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