उज्जैन। किन्नर अखाड़े ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पहली बार एक नागा किन्नर, मां काली नंद गिरी को...
उज्जैन। किन्नर अखाड़े ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पहली बार एक नागा किन्नर, मां काली नंद गिरी को महामंडलेश्वर की उपाधि से नवाजा है। यह आयोजन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान किया गया।
काली नंद गिरी के पास अद्भुत ज्ञान
काली नंद गिरी मात्र 27 वर्ष की हैं। उनके पास 18 भाषाओं का अद्भुत ज्ञान है और उन्होंने तंत्र साधना में पीएचडी (PhD) की है। वह अघोरी परंपरा का पालन करती हैं और अपनी 70 सिद्ध खोपड़ियों के साथ तंत्र क्रियाएं करने के लिए जानी जाती हैं। उन्हें यह पद उनकी वर्षों की कठिन आध्यात्मिक साधना और तपस्या के सम्मान में दिया गया है।
विधिवत पटाभिषेक किया गया
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में काली नंद गिरी का विधिवत पटाभिषेक किया गया। इस बैठक में केवल काली नंद गिरी ही नहीं, बल्कि सात किन्नर संतों को 'श्री महंत' बनाया गया और कुल चार संतों को 'महामंडलेश्वर' की उपाधि दी गई।
ऐतिहासिक पहल
यह पहली बार है जब किसी युवा नागा किन्नर को इतने उच्च धार्मिक पद पर प्रतिष्ठित किया गया है, जो किन्नर अखाड़े की बढ़ती आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है। पद ग्रहण करने के बाद काली नंद गिरी ने कहा, मैं आज बहुत खुश हूँ। इतने सालों की तपस्या के बाद इतनी छोटी उम्र में मुझे इतना बड़ा पद और सम्मान मिला है, इसके लिए मैं अपने गुरुओं की सदैव ऋणी रहूँगी। इस नियुक्ति को 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ कुंभ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जहाँ किन्नर अखाड़ा अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएगा।
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