MP News : भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लंबे समय से वेतन न दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।
MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लंबे समय से वेतन न दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रशासनिक देरी या गलत निर्णय के आधार पर किसी अधिकारी को दंडित नहीं किया जा सकता। इसी के तहत महिला क्रिकेट खिलाड़ी क्रांति के पिता को पुनः पुलिस सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले के अनुसार, संबंधित अधिकारी को वर्ष 2012 में सेवा से हटा दिया गया था और इसके बाद से उनका वेतन भी रोक दिया गया था। अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि न तो उनके खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक जांच पूरी हुई थी और न ही सेवा समाप्ति का उचित आधार प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद उन्हें लगभग 13 वर्षों तक वेतन से वंचित रखा गया।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी कर्मचारी को बिना अंतिम निर्णय और ठोस प्रमाण के वेतन से वंचित रखना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कर्मचारी और उसके परिवार को लंबे समय तक आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी, जो न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि संबंधित अधिकारी को सेवा में बहाल किया जाए और नियमानुसार बकाया वेतन व अन्य लाभों पर भी विचार किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इस फैसले को न केवल संबंधित परिवार के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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