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उज्जैन एक्सप्रेसवे से खेतों का रास्ता बंद

उज्जैन एक्सप्रेसवे से खेतों का रास्ता बंद, किसानों ने की हेलीकॉप्टर की मांग

MP News : उज्जैन। उज्जैन–गरोठ एक्सप्रेसवे के किनारे बसे कई गांवों के किसानों ने आरोप लगाया है कि..

उज्जैन एक्सप्रेसवे से खेतों का रास्ता बंद किसानों ने की हेलीकॉप्टर की मांग

उज्जैन एक्सप्रेसवे से खेतों का रास्ता बंद, किसानों ने की हेलीकॉप्टर की मांग |

MP News : उज्जैन। उज्जैन–गरोठ एक्सप्रेसवे के किनारे बसे कई गांवों के किसानों ने आरोप लगाया है कि इस हाईवे के निर्माण से उनके खेतों तक पहुंच के पारंपरिक रास्ते बंद हो गए हैं। किसानों का कहना है कि ना तो सर्विस रोड बनाई गई और ना ही अंडरपास। इससे वे अपने ही खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

किसानों के अनुसार, इस स्थिति में उन्हें या तो अपनी जमीन छोड़नी पड़ रही है, या फिर पड़ोसी किसानों को हर फसल पर पैसे देकर उनके खेतों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

यह मामला इस सप्ताह तब फिर सामने आया जब उन्तेसरा गांव के एक किसान ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए अपने खेत तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर की मांग कर दी। अधिकारियों ने इस मांग को प्रतीकात्मक बताया, लेकिन किसानों का कहना है कि यह उनकी गहरी हताशा को दर्शाता है, क्योंकि एक्सप्रेसवे लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन बुनियादी पहुंच अब भी नहीं मिली है।

किसानों की पीड़ा

उन्तेसरा के किसान रोहित ने बताया कि हाईवे ने उनकी नौ बीघा जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया, जिससे एक हिस्सा पूरी तरह घिर गया है। उन्होंने कहा,“अपने ही खेत तक पहुंचने के लिए मुझे पड़ोसियों के खेतों से गुजरना पड़ता है और हर फसल पर उन्हें ₹5,000 देने पड़ते हैं। अगर कल वे मना कर दें, तो मेरे पास कोई विकल्प नहीं रहेगा।”

एक अन्य किसान मानसिंह राजोरिया ने बताया कि उनकी जमीन पिछले तीन वर्षों से बिना खेती के पड़ी है, क्योंकि एक्सप्रेसवे की दीवार और फेंसिंग के कारण ट्रैक्टर का रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने कहा,“हमने रास्ता मांगा, कुछ नहीं हुआ, फिर हेलिकॉप्टर की मांग की, ताकि यह दिखा सकें कि हम कितने बेबस हो चुके हैं।”

पूर्व सरपंच और जमीन विवाद

पूर्व सरपंच राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि निर्माण के दौरान अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सर्विस रोड बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में आरक्षित जमीन को घेरकर उसका कुछ हिस्सा वन विभाग को सौंप दिया गया। साथ ही, पुराने ग्रामीण रास्ते भी बंद कर दिए गए, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।कुछ किसानों ने भूमि विवाद का भी आरोप लगाया है। विक्रम नामक किसान ने बताया कि परियोजना के लिए उनकी जमीन का एक हिस्सा अधिग्रहित किया गया, जिसका मुआवजा मिला, लेकिन हाईवे के उस पार बची हुई जमीन पर वे अब तक कब्जा नहीं ले सके हैं।

प्रशासन का पक्ष

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए घाटिया एसडीएम राजाराम करजारे ने कहा कि किसानों से आवेदन प्राप्त हुए हैं और वे विचाराधीन हैं।वहीं, एनएचएआई के परियोजना निदेशक राहुल जाजोरिया ने किसानों की चिंताओं को जायज बताते हुए कहा कि समस्या के समाधान पर काम किया जा रहा है।फिलहाल किसानों का कहना है कि विकास तो आ गया है, लेकिन उनकी आजीविका तक पहुंच नहीं।

 

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