महिषासुर: इसे वरदान था कि कोई पुरुष इसे नहीं मार सकता। माँ दुर्गा ने महिषासुरमर्दिनी रूप धरकर इसका वध किया।
Editor Name: Prime News
रक्तबीज: इसके खून की हर बूंद से नया राक्षस पैदा होता था। माँ काली ने इसका सारा खून जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया।
शुम्भ: स्वर्ग पर कब्जा करने वाले इस महाशक्तिशाली असुर का वध माँ ने भयंकर युद्ध के बाद किया।
निशुम्भ: यह शुम्भ का भाई था, जिसका अंत भी देवी चंडिका ने युद्ध भूमि में किया।
चण्ड: शुम्भ-निशुम्भ के इस सेनापति का वध करने के कारण ही माँ काली का नाम ''चामुंडा'' पड़ा।
मुण्ड: चण्ड के साथ ही मुण्ड का भी माँ काली ने संहार किया था।
धूम्रलोचन: मां दुर्गा (महासरस्वती रूप) की सिर्फ एक ''हुंकार'' (गर्जना) से यह राक्षस वहीं भस्म हो गया था।
दुर्गमासुर: इसने चारों वेदों को चुरा लिया था। मां दुर्गा ने इसका वध किया, जिसके बाद उन्हें ''दुर्गा'' नाम मिला।
मधु: सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु के कान के मैल से उत्पन्न इस राक्षस का वध योगनिद्रा (महाकाली) की प्रेरणा से हुआ।
कैटभ: मधु का साथी, जिसका वध भी आदिमाया महाकाली की माया और सहायता से किया गया।
अरुणासुर: इसे इंसानों, जानवरों और हथियारों से न मरने का वरदान था। माँ ने असंख्य काली मधुमक्खियों का रूप धरकर इसे डंक मार-मारकर मार डाला। जिसके बाद माँ का नाम भ्रामरी पड़ा।
चिक्षुर: यह महिषासुर की सेना का महाप्रतापी सेनापति था, जिसका वध देवी दुर्गा ने अपने शस्त्रों से किया।
चामर: महिषासुर का एक और भयंकर सेनापति, जिसे माँ दुर्गा और उनके वाहन सिंह ने मिलकर यमलोक भेजा।
विडालाक्ष: महिषासुर का मंत्री और योद्धा, जो देवी दुर्गा के हाथों युद्ध में मारा गया।
असिलोमा: महिषासुर की सेना का एक और प्रमुख असुर राजा, जिसका अंत देवी चंडिका के तीखे बाणों से हुआ।