Thursday, October 08, 2026

भारतीय सिनेमा और कला में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2013 में नाना पाटेकर को पद्मश्री से सम्मानित किया।

Editor Name: Prime News

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ। उनका पूरा नाम विश्वनाथ पाटेकर है।

नाना पाटेकर ने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से पढ़ाई की और आगे अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने कई फिल्मों में छोटे और सहायक किरदार निभाए।

1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में उनके अभिनय ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में नाना पाटेकर के अभिनय को बेहद सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

नाना पाटेकर को ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले हैं।

‘अंगार’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उन्होंने खलनायक की भूमिकाओं को भी प्रभावशाली अंदाज में निभाया और दोनों के लिए फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार जीता।

नाना पाटेकर ने केवल अभिनय ही नहीं किया, बल्कि ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ से निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा। फिल्म में उन्होंने अभिनय के साथ लेखन और निर्देशन में भी योगदान दिया।

2004 की फिल्म ‘अब तक छप्पन’ में उन्होंने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया, जिसे उनके करियर की चर्चित भूमिकाओं में गिना जाता है।

‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार निभाकर नाना पाटेकर ने अपनी गंभीर छवि से अलग हास्य अभिनय की क्षमता भी दिखाई।

2010 की फिल्म ‘राजनीति’ में उन्होंने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक किरदार निभाया, जिससे उनकी अभिनय क्षमता का एक और पहलू सामने आया।

नाना पाटेकर ने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया। ‘नटसम्राट’ में उनके अभिनय को विशेष सराहना मिली और उन्हें मराठी फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. प्रकाश आमटे की भूमिका निभाकर नाना पाटेकर ने जीवनीपरक सिनेमा में भी अपनी मजबूत छाप छोड़ी और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर मराठी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।

गंभीर किरदार, खलनायक, पुलिस अधिकारी, कॉमेडी और सामाजिक विषयों वाली फिल्मों तक नाना पाटेकर ने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी है। यही विविधता उनके लंबे फिल्मी सफर की खास पहचान रही है।