रेखा ने कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
साल 1970 में रिलीज हुई फिल्म सावन भादों रेखा की शुरुआती हिंदी फिल्मों में से एक थी, जिसने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई।
शुरुआती करियर में आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद रेखा ने अपनी भाषा, अभिनय और व्यक्तित्व पर मेहनत की और हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हुईं।
साल 1980 में आई फिल्म खूबसूरत में रेखा के चुलबुले अंदाज को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
साल 1981 की फिल्म उमराव जान में रेखा ने एक शायरा और तवायफ का किरदार निभाया। उनकी अदाकारी के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रेखा ने अमिताभ बच्चन के साथ मुकद्दर का सिकंदर, सिलसिला और मिस्टर नटवरलाल जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में उनकी भूमिकाएं आज भी याद की जाती हैं।
साल 1988 में रिलीज हुई खून भरी मांग में रेखा ने बदले की भावना से प्रेरित एक महिला का किरदार निभाया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
फिल्म खिलाड़ियों का खिलाड़ी में रेखा ने नकारात्मक भूमिका निभाई। उनके अभिनय को सराहना मिली और उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
रेखा ने अपने लंबे फिल्मी सफर में अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम किया और बदलते दौर में भी दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए रखी।
पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में रेखा ने रोमांस, कॉमेडी और गंभीर भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा दिखाई।
रेखा अपनी निजी जिंदगी को लेकर हमेशा चर्चा में रही हैं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने व्यक्तिगत जीवन के कई पहलुओं पर सीमित ही बात की है।
अभिनय के अलावा रेखा ने सार्वजनिक जीवन में भी भागीदारी की। वह साल 2012 से 2018 तक राज्यसभा की मनोनीत सदस्य रहीं।
रेखा का सुनहरी कांजीवरम साड़ी, गहरे रंग की लिपस्टिक और पारंपरिक आभूषणों वाला अंदाज उनकी खास पहचान बन चुका है।
भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने साल 2010 में रेखा को पद्मश्री से सम्मानित किया।