Madhya Pradesh : बुरहानपुर। एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत, बुरहानपुर जिले में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों ने गुरुवार को..
Madhya Pradesh : बुरहानपुर। एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के तहत, बुरहानपुर जिले में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों ने गुरुवार को केले के पत्तों में शरीर लपेटकर और सागौन के पत्ते सिर पर पहनकर अपनी जमीन के बदले दोगुना मुआवजा देने की मांग की। किसानों का कहना है कि यह मुआवजा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार मिलना चाहिए।
यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन गांधीवादी तरीके से किया गया, ताकि किसानों के अनुसार तीन वर्षों से उनकी वैध मांगों पर प्रशासन की “उपेक्षा” को उजागर किया जा सके। किसानों ने बताया कि वे पिछले तीन साल से लगातार धरना, ज्ञापन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहित भूमि के लिए बाजार दर से दोगुना मुआवजा दिया जाए। उनका आरोप है कि प्रशासन को बार-बार आवेदन देने के बावजूद उनकी मांगें नहीं मानी जा रहीं।
किसानों ने अपनी मांग को “भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013” के आधार पर सही बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून ग्रामीण इलाकों में अधिग्रहित भूमि के लिए अधिक मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था करता है। इसके अलावा किसानों ने अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 300A (संपत्ति का संवैधानिक अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि पारदर्शिता, सहमति और उचित मुआवजे के बिना जमीन नहीं ली जा सकती।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी जिम्मेदारियों को कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधाओं और भोजन, कपड़ा, मकान जैसी बुनियादी जरूरतों के बिना “आदिम जीवन” जीने पर मजबूर करना चाहती है, इसलिए वह न्यूनतम मुआवजे पर मामला निपटाना चाहती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों की अनदेखी जारी रखी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और किसी भी स्थिति के लिए जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब जिले के प्रभारी मंत्री और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट बुरहानपुर दौरे पर थे। आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए सिलावट ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर “गंभीरता से विचार” कर रही है। हालांकि किसानों ने कहा कि अब केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, हमें बयान नहीं, फैसले चाहिए। जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष खत्म नहीं होगा।
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