कॉमेडियन रवि गुप्ता का ‘केबीसी’ का अनुभव: अमिताभ के सामने बैठकर हुई घबराहट और खुशियों भरे पल
कॉमेडियन रवि गुप्ता का ‘केबीसी’अनुभव
स्टैंडअप कॉमेडियन रवि गुप्ता ने हाल ही में अमिताभ बच्चन के साथ अपनी पहली मुलाकात और करियर की कहानी साझा की। प्रतापगढ़ के रवि, जो कभी छोटे मंचों पर चुटकुले सुनाया करते थे, आज पूरे देश में अपनी कॉमेडी के लिए पहचाने जाते हैं। ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में बतौर गेस्ट बैठना उनके लिए किसी बड़े सपने के सच होने जैसा था।
केबीसी कॉल पर पहली प्रतिक्रिया:
रवि बताते हैं कि जब उन्हें शो का कॉल आया, तो पहले उन्हें यह मजाक लगा। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि कोई उन्हें ऐसे बड़े मंच पर बुलाएगा। लेकिन जब टीम ने कहा कि यह जगह उनकी ही है, तो उन्हें पहली बार यकीन हुआ कि उनकी मेहनत किसी तक पहुंची है।
अमिताभ बच्चन के सामने बैठने का अनुभव:
रवि कहते हैं कि अमिताभ के सामने बैठना ऐसा था जैसे किसी कहानी के अंदर खुद को देखना। पहले थोड़ी घबराहट तो हुई, लेकिन उनकी सहजता और नम्रता ने सभी तनाव दूर कर दिए। रवि के लिए यह अनुभव बेहद खास था क्योंकि महानता सिर्फ काम से नहीं, बल्कि व्यवहार से भी बनती है।
सबसे यादगार पल:
उनका सबसे खास पल वह था जब अमिताभ ने उन्हें गले लगाया। रवि कहते हैं कि यह गले लगाना किसी फिल्मी अंदाज वाला नहीं था, बल्कि सम्मान और स्नेह से भरा हुआ था। यह उनके लिए किसी ट्रॉफी से कम नहीं था।
ऑफ स्क्रीन बातचीत:
ऑफ स्क्रीन अमिताभ का व्यवहार भी रवि को बहुत प्रभावित कर गया। उन्होंने कहा कि “आज आप लोग शो संभालिए।” रवि को यह भरोसा और सहजता सीधे दिल तक उतर गई।
कॉमेडी की यात्रा:
रवि की कॉमेडी जर्नी आसान नहीं थी। शुरुआत में कई रातें निराशा और संघर्ष में गुजर गईं। लेकिन एक वीडियो वायरल होने के बाद उनके करियर का रास्ता साफ हुआ। पहले सोल्ड आउट शो ने उन्हें एहसास दिलाया कि मेहनत का फल जरूर मिलता है।
अन्य प्रतिभाएं:
रवि सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि अच्छे आर्टिस्ट भी हैं। वह स्केचिंग करते हैं और मीडिया में काम कर चुके हैं। उन्हें काम करने का जुनून है और वे किसी भी क्षेत्र में पूरी मेहनत और ईमानदारी से कदम रखते हैं।
कॉमेडी और दर्द का संबंध:
रवि मानते हैं कि जो लोग दूसरों को हंसाते हैं, उनमें खुद गहरी समझ और अनुभव होता है। उनका मानना है कि अच्छे जोक्स अक्सर व्यक्तिगत अनुभव और दर्द से जन्म लेते हैं।
भविष्य की योजनाएं:
रवि अगर मौका मिले तो एक्टिंग में भी हाथ आजमाना चाहेंगे। वे सोच-समझ कर ही किसी क्षेत्र में कदम रखते हैं और हमेशा ईमानदारी से काम करना पसंद करते हैं।
कलाकार की स्वतंत्रता:
रवि का मानना है कि कलाकार को अपनी बात कहने की आज़ादी होनी चाहिए, लेकिन साथ ही ऑडियंस और भावनाओं का सम्मान भी जरूरी है। यही संतुलन कला को सुंदर और प्रभावी बनाता है।
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