बिहार के छह जिलों में माताओं के दूध में यूरेनियम प

बिहार में मां के दूध में मिला यूरेनियम, शिशुओं की सेहत पर बढ़ा खतरा

Bihar Uranium Contamination

दूध में यूरिनियम खतरा

बिहार के कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। अब एक नई रिपोर्ट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि बिहार के छह जिलों में रहने वाली माताओं के दूध में यूरिनियम की मात्रा पाई गई है, जो शिशुओं के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है रिपोर्ट के अनुसार, जांच किए गए 40 नमूनों में यूरेनियम की मौजूदगी दर्ज की गई, और लगभग 70% बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई गई है। यह स्थिति उन इलाकों में अधिक देखी जा रही है, जहां भूजल के दूषित होने की समस्या पहले से मौजूद है।

मां के दूध में यूरेनियम कैसे पहुंच रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, जिस इलाके का पानी प्रदूषित होता है, उसी पानी का उपयोग घरों में पीने और खाना बनाने के लिए होता है। महिलाएं जब लंबे समय तक ऐसा पानी पीती हैं, तो यूरेनियम  शरीर में जमा होने लगता है और इसका प्रभाव स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध तक पहुंच जाता है।

शिशुओं पर संभावित खतरे

यूरेनियम से दूषित दूध पीने वाले बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे—

  • गुर्दों पर असर
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़ी दिक्कतें
  • शारीरिक विकास धीमा होना
  • कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता

शिशु इस उम्र में सबसे संवेदनशील होते हैं, इसलिए थोड़ी भी मात्रा में रासायनिक तत्वों का असर गंभीर हो सकता है।

भूजल में यूरेनियम की बढ़ती मात्रा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ जिलों में भूजल में यूरेनियम की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है। जहां मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है, वहीं कई जगह इससे ज्यादा स्तर दर्ज किए गए हैं। इसका सीधा असर वहां के लोगों की सेहत और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ रहा है।

क्या हैं जरूरी कदम?

विशेषज्ञों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को तुरंत कुछ उपाय करने की सलाह दी है—

  • दूषित पानी की नियमित जांच
  • सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था
  • महिलाओं को शुद्ध पानी उपलब्ध कराना
  • प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच अभियान चलाना

इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिहार के कई घरों में शिशुओं का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। पानी की गुणवत्ता में सुधार और जागरूकता ही इस समस्या से निपटने का सबसे बड़ा उपाय है।

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